18 February 2019



प्रादेशिक
मप्र में जल पर 'जंग' के आसार
14-09-2012
मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के जल पर राजनीतिक जंग छिड़ने के आसार बन गए हैं। प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार जहां अपने हक की खातिर जल सत्याग्रह करने वालों पर ही सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस सत्याग्राहियों के साथ खडे़ होकर सरकार पर हमला बोलने में पीछे नहीं है।राज्य में नर्मदा नदी पर खंडवा में बने ओंकारेश्वर बांध व हरदा में इंदिरा सागर बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने के खिलाफ प्रभावितों ने जल सत्याग्रह का सहारा लिया। ओंकारेश्वर के जल सत्याग्रह के 17 दिन बाद सरकार को झुकना पड़ा और जलस्तर घटाने व जमीन के बदले जमीन देने का ऐलान भी करना पड़ा। एक तरफ सरकार ने ओंकारेश्वर बांध के सत्यग्राहियों की मांग मान ली और तीन मंत्रियों की अगुवाई में पांच सदस्यीय समिति बना दी। वहीं दूसरी ओर इंदिरा सागर प्रभावितों की मांग पर उसने सीधे बात करने से ही इंकार कर दिया। इंदिरा सागर में चल रहे जल सत्याग्रह के 15वें दिन जिला प्रशासन ने सख्ती का प्रयोग कर बुधवार को 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया। उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हरदा में प्रशासन द्वारा की गई सख्ती को सही ठहराया है। उन्होंने कहा, \'\'जल सत्याग्रह कर रहे लोगों का जीवन संकट में आ गया था। वन विभाग ने विषैले जंतुओं के खतरे की आशंका व्यक्त की थी। चिकित्सा परीक्षण में उनके गिरते स्वास्थ्य पर भी चिंता जताई गई थी। इसी आधार पर हरदा जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है।\'\' विजयवर्गीय ने ओंकारेश्वर बांध के आंदोलन के तरीके पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह आंदोलनकारियों का सम्मान करते हैं, मगर उनके पास ऐसे वीडियो हैं, जिसमें मीडिया के आने पर पानी में आंदोलनकारियों के पहुंचने तथा मीडिया के जाते ही बाहर निकल आने के दृश्य हैं। कांग्रेस के सांसद व राष्ट्रीय सचिव अरुण यादव ने सरकार से प्रभावितों के दर्द को समझकर समस्या के जल्द निवारण की मांग की। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर बांध के मामले में सरकार को जो फैसला शुरू में ही ले लेना चाहिए था उसे लेने में 15 दिन लग गए। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने हरदा का दौरा किया। उन्होंने सरकार पर प्रभावितों की उपेक्षा करने और सत्याग्रह कर रहे लोगों पर की गई पुलिस कार्रवाई की निंदा की है।