22 February 2019



राष्ट्रीय
पब्लिक अथॉरिटी है सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
17-09-2012
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी [डीएसजीएमसी] भी एक लोक प्राधिकरण [पब्लिक अथारिटी] है। इसलिए यह भी सूचना के अधिकार के दायरे में आता है, क्योंकि यह लोगों की जन कल्याण से जुड़ी एक सामाजिक संस्था है। यह टिप्पणी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति राजीव सहाय ने डीएसजीएमसी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें डीएसजीएमसी ने कहा था कि वह पब्लिक अथारिटी नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर हम सूचना के अधिकार के तहत सेक्शन 2 के अनुभाग एच को पढ़ते हैं तो पब्लिक अथारिटी अर्थात लोक प्राधिकरण की परिभाषा स्पष्ट हो जाती है। जिसके अनुसार संसद के प्रावधानों के अनुसार चुनी गई बॉडी पब्लिक अथारिटी कहलाती है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी दिल्ली सिख गुरुद्वारा एक्ट की धारा तीन के तहत बनाई गई है। यह कानून संसद द्वारा बनाया गया है। हाईकोर्ट ने डीएसजीएमसी के अधिवक्ता केटीएस तुलसी द्वारा दी गई उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह कमेटी न तो संसद के कानून से विकसित की गई है और न ही एक पब्लिक अथारिटी है, क्योंकि यह कमेटी सरकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय सहायता नहीं ले रही। हाईकोर्ट ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि किसी पब्लिक अथारिटी को सरकार द्वारा वित्तीय मदद दी जाए। ऐसे में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी ऐसी ही श्रेणी में आने वाली एक पब्लिक अथारिटी है और यह आरटीआई के दायरे में आती है। उल्लेखनीय है कि एक व्यक्ति ने सूचना के अधिकार के तहत दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से कुछ सूचनाएं मांगी थी। सूचनाएं न दिए जाने पर संबंधित व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 22 जुलाई 2007 को याचिकाकर्ता के हक में अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले को डबल बेंच के समक्ष दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने यह कहते हुए चुनौती दी थी कि वे पब्लिक अथारिटी की श्रेणी में नहीं आते, लिहाजा उन्हें आरटीआइ के दायरे में नहीं लाया जा सकता।