19 February 2019



राष्ट्रीय
लगता है कांग्रेस ने थप्पड़ की आवाज नहीं सुनी : आदित्य ठाकरे
17-09-2012
मुंबई में शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे की ढलती उम्र में अब उनका पोता आदित्य ठाकरे अपने दादा की जहर उगलने की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। 22 साल के आदित्य ठाकरे ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिए राजनीतिक भाषण में कांग्रेस के खिलाफ जहर उगला है। आदित्य ने कहा, आज काग्रेस ने लोगों की आवाज सुनी है, लेकिन थप्पड़ की वह आवाज नहीं सुनी है, जो कान के नीचे बजाने से पैदा होती है माना यह जा रहा है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बढ़ते कद को देखते हुए शिवसेना अब आदित्य को तेजतर्रार नेता के तौर पर पेश करना चाहती है। चूंकि उद्धव ठाकरे की छवि एक शांत नेता की है, इसलिए बाल ठाकरे अपने पोते के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं। शिवसेना की इकाई युवासेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने रविवार को शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक मंदिर तक साइकलों और बैलगाड़ियों के साथ विरोध प्रदर्शन रैली की। यह रैली सब्सिडी वाली रसोई गैस में कटौती और डीजल के दामों में बढ़ोतरी के विरोध में थी। रैली में करीब 10 हजार लोग शामिल हुए। आदित्य ने कहा, हम काग्रेस के खिलाफ इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे। आम लोगों की आवाज काग्रेस तक पहुंचेगी और हम यह पक्का करेंगे। आदित्य रैली का नेतृत्व पैदल कर रहे थे। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी और सासद संजय राउत समेत शिवसेना के करीब दर्जन भर बड़े नेता थे। शिवसेना के ज्यादातर आयोजनों और रैलियों में दिखने के बावजूद आदित्य ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से भाषण नहीं दिया था। युवा सेना के एक कार्यकर्ता ने कहा, भाषण से हम सब हैरान रह गए। हम करीब 2 साल से आदित्य साहेब के बोलने का इंतजार कर रहे थे। यह अहम है कि उन्होंने उद्धव साहेब की गैरमौजूदगी में रैली का नेतृत्व किया और भाषण दिया। उद्धव साहेब और बाला साहेब की खराब तबीयत के मद्देनजर पार्टी में थोड़ा ढीलापन था, लेकिन उनके भाषण से युवा सैनिक जोश में आ गए हैं। हालाकि आदित्य के बोलने के बाद और रैली के खत्म होने से पहले उद्धव आ गए थे। शिवसेना के एक कार्यकर्ता ने कहा, सेना में सब कुछ सार्वजनिक भाषण देने पर ही है। बाला साहेब ने अपने बोलने के दम पर पार्टी खड़ी की। आदित्य साहेब को लगातार बोलना चाहिए और उसी तरह की आक्त्रामकता दिखानी चाहिए, जैसी उन्होंने रविवार को दिखाई। एक और कार्यकर्ता के मुताबिक यह रैली 2014 के आम चुनावों के मद्देनजर आदित्य को उभारने के लिए आयोजित की गई थी। शिवसेना सूत्रों ने बताया कि आदित्य ने इस रैली के आयोजन में खुद रुचि दिखाई।