19 February 2019



राष्ट्रीय
मुंबई के प्रवासियों में ज्यादातर महाराष्ट्र के ही लोग
18-09-2012
शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) मुंबई की बढ़ती आबादी के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोगों को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन हाल के एक सर्वे से दोनों दलों के इस झूठ की पोल खोल कर रख दी है। राष्ट्रीय सैंपल सर्वे संगठन (एनएसएसओ) के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार बाहर से मुंबई आने वालों में ज्यादातर लोग महाराष्ट्र के ग्रामीण हिस्सों के हैं। सर्वे का कहना है कि मायानगरी में अन्य राज्यों से आनेवाले लोगों की तादाद 20 से 25 प्रतिशत के बीच ही होती है। ध्यान रहे कि मुंबई में बिहार और उत्तर प्रदेश से आनेवाले प्रवासियों को लेकर अक्सर शिवसेना और मनसे हायतौबा मचाते रहते हैं। एनएसएसओ की हालिया रिपोर्ट इन दलों के नेताओं का मुंह बंद करने के लिए काफी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मुंबई आनेवाले प्रति 1000 प्रवासियों में से 370 प्रवासी महाराष्ट्र के ही ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। अन्य राज्यों से यहा आनेवालों की संख्या 198 होती है। यह भी ध्यान देने योग्य तथ्य है कि देश की आर्थिक राजधानी का दर्जा रखनेवाली मुंबई में बिहार, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा जैसे तथाकथित बीमारू प्रदेशों के अलावा दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों से भी बड़ी संख्या में प्रवासी आते हैं। सर्वे के अनुसार महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों से मुंबई आनेवाले प्रवासियों में बड़ी संख्या ऐसी महिलाओं की होती है, जो विवाह के बाद मुंबई आ जाती हैं। प्रति 1000 प्रवासियों में इनकी संख्या 538 बताई गई है। प्रवासियों की स्थिति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो-तीन दशक में मुंबई और उसके निकटवर्ती ठाणे में रोजगार के अवसर खासे कम हुए हैं। यह स्थिति खासतौर पर कपड़ा मिलों के बंद होने एवं नए उद्योग न खुलने से पैदा हुई है। जनगणना के आकड़े बताते हैं कि मुंबई में उत्पादन क्षेत्र से 1961 में जहा 41 फीसद रोजगार पैदा होता था, वहीं 2001 में यह संख्या घट कर मात्र 20 प्रतिशत रह गई है। उत्पादन क्षेत्र में रोजगार घटने के बाद निर्माण क्षेत्र में ही रोजगार के अधिक अवसर रह गए हैं। खासतौर से बिहार से अन्य राज्यों में जाने वालों में से तो 8.5 प्रतिशत प्रवासी ही मुंबई का रुख करते हैं। सबसे ज्यादा 25.4 बिहारी प्रवासी दिल्ली जाते हैं। गौरतलब है कि यह संख्या मुंबई से तीन गुना है।