16 February 2019



राष्ट्रीय
RSS से जुड़े उद्योगपति के फार्महाउस पर अन्‍ना व रामदेव की गुप्‍त
21-09-2012

जनलोकपाल के लिए मिलकर आंदोलन छेड़ने वाले अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के रास्ते अब अलग हो गए हैं। अन्ना ने बुधवार को खुद इसकी घोषणा की।  अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ नई रणनीति बनाने के लिए कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों के साथ लगभग नौ घंटे बैठक की। इसमें अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, संतोष हेगड़े, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास समेत कई अन्य सदस्य शामिल हुए।  वहीं, सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल   ( केजरीवाल से उम्‍मीदों और नाउम्‍मीदी के 9 कारण, पढ़ेंऔर अन्य लोगों के साथ बैठक के बाद अन्ना हजारे ने योगगुरु बाबा रामदेव से गोपनीय ढंग से लंबी बातचीत की। इसके लिए अन्ना संघ से जुड़े एक उद्योगपति के फार्महाउस पर गए, जहां रामदेव पहले से मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, वहां से दोनों उसी उद्योगपति के गोल्फ लिंक स्थित घर पर पहुंचे। दोनों के बीच लगभग 40 मिनट की बातचीत हुई। यहां से अन्ना पहले निकले और करीब दस मिनट बात रामदेव अपनी गाड़ी से निकले। यह पता नहीं लग पाया है कि दोनों में किस बात पर मंत्रणा हुई। अन्ना ने बाद में कहा, ‘अरविंद या किसी अन्य पार्टी से मेरा कोई संबंध नहीं होगा। मैं किसी पार्टी के उम्मीदवार का प्रचार नहीं करूंगा। चुनाव के दौरान कोई भी पार्टी मेरे नाम और फोटो का इस्तेमाल नहीं करेगी।उन्होंने एक सवाल पर कहा, ‘अरविंद और हमारे रास्ते अलग हैं लेकिन मंजिल एक है।अन्ना ने टीम टूटने पर दुख जताया।  पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने इस मुद्दे पर कहा, ‘आंदोलन अधूरा है। इसे संगठित करने की जरूरत है। हम इसकी कोशिश करेंगे।आप अन्ना या अरविंद, किसके साथ हैं, इसके जवाब में बेदी ने कहा, ‘मैंने पहले ही कहा था कि मैं आंदोलन के पक्ष में हूं। पार्टी के नहीं। वैसे भी हमें कानून चाहिए। चाहे किसी भी पार्टी की सरकार इसे बनाए। हम कानून बनवाने के लिए प्रयास करते रहेंगे।हजारे ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) द्बारा कराए गए जनमत सर्वेक्षण को भी खारिज कर दिया। कहा, ‘ मुझे फेसबुक , इंटरनेट से कराए गए सर्वेक्षण पर भरोसा नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक पार्टी बनाना दोष नहीं है और ना ही चुनाव लड़ने वालों का विरोध है। अगर उन्हें लगता है कि उन्हें संसद में बहुमत हासिल हो जाएगा तो यह अच्छी बात है। पर हमारे रास्ते अलग हो गए हैं। हम दोनों ने अपना अलग-अलग रास्ता चुना है।गौरतलब है कि केजरीवाल राजनीतिक पार्टी बनाने के पक्ष में हैं। उन्होंने पार्टी बनाने के संबंध में वेबसाइट, सोशल नेटवर्किग साइट और एसएमएस के जरिए सर्वे कराया है। उनके अनुसार 70 प्रतिशत लोग पार्टी बनाने के पक्ष में हैं।