23 March 2019



प्रादेशिक
मिठाई के लिए मावा लेने जा रहे हैं तो सावधान, ऐसे करें पहचान
06-03-2012

ग्वालियर। होली पर गुझिया या अन्य पकवान बनाने के लिए यदि आप मावा खरीदने जा रहे हैं तो इसकी शुद्धता की पहले अच्छी तरह जांच कर लें। कहीं ऐसा न हो कि आपको दुकानदार मिलावटी मावा दे दे और आपका पकवान बेस्वाद हो जाए। इन दिनों बड़ी मात्रा में मिलावटी मावे का उत्पादन किया जा रहा है। शहर में ही १६क् से तीन सौ रुपए किलो तक मावा मिल रहा है। मावे की कीमत में दोगुने अंतर को लेकर लोग स्वयं हैरत में हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात तो यह है कि मावे में यूरिया की मिलावट की जाती है जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
मिलावटी मावे की मांग प्रदेश के अन्य शहरों में भी
होली नजदीक आते ही मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। इस दौरान खाने-पीने की चीजों की भारी बिक्री होने के कारण वे मिलावट के जरिए मुनाफा कमाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। सबसे अधिक मिलावट मावे में हो रही है। अंचल में बनने वाले मिलावटी मावे की मांग प्रदेश के अन्य जिलों में भी है। रोजाना दो से तीन ट्रक मावा बाहर भेजा जा रहा हैं। इसके अलावा रेल व निजी बस के माध्यम से भी इसे भेजा जा रहा है। होली के अलावा मिलावटी मावे का कारोबार रक्षाबंधन व दीपावली पर होता है। शहर में मोर बाजार के अलावा मुरार व हजीरा में भी मावे की मंडियां हैं। दुकानदार ग्राहकों से मावा शुद्ध होने की बात करते हैं लेकिन जब इसका उपयोग किया जाता है तब इसकी शुद्धता या मिलावट का पता चलता है।