21 February 2019



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क्या जरूरी है आईएएस अफसरों की पत्नियो की विदेश यात्रा
01-10-2012

क्या किसी भी विदेश यात्रा में अफसरों का पत्नियों को ले जाना जरूरी है। यह सवाल मध्यप्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इसीलिए उठ रहा हैं क्योंकि एक ओर तो केंद्र औऱ राज्य सरकारें तमाम टैक्सों के रूप में आम जनता की कमर तोड़ रही हैं, और उसी गरीब जनता के पैसे से अफसर अपनी पत्नियों के साथ विदेश यात्राएं कर रहे हैं। उनके साथ जाने से प्रदेश को क्या हासिल होगा इस बात पर कोई भी राजनीतिक दल खुलकर जवाब देने को तैयार नहीं है लेकिन लोकतंत्र में शामिल हो रही यह राजशाही अपने आप में गांधी के आदर्शों औऱ जनता के लिए जनता के शासन की अवधारणा को भी झुठला रही हैं। प्रसंग मुख्यमत्री शिवराज सिंह चौहान की अमेरिका यात्रा का है। वे विश्व बैंक के बुलावे पर सपरिवार विदेश गए हैं। उनके साथ ही आधा दर्जन अफसरों की फौज भी गई है। आप कहेंगे कि इसमें नया क्या है। तो हम आपको बताते हैं कि इस दौरे में इस बार अफसरों की पत्नियां भी गई हैं। वे क्यो गई हैं , इसका जवाब है प्रदेश में महिला सशक्तीकरण चल रहा है। लेकिन लोग पूछ रहे हैं कि महिला सशक्तिकरण क्या अफसरों की पत्नियों से होगा। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक अफसर पर कम से कम पांच लाख रुपए खर्च होगा इसका आधा तो पत्नी पर भी होगा लेकिन बदले में प्रदेश को क्या मिलेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आईए अब जानते हैं कि क्या अफसरों को पत्नियों को ले विदेश ले जाना जरूरी है या नहीं

- पत्नियों को विदेश यात्रा पर ले जाना जरूरी है, इसके पक्ष में  तर्क यह दिया जा रहा है कि यह महिला सश्क्तिकरण का हिस्सा है। पर लोग पूछ रहे हैं कि अगर महिला सशक्तीकरण ही करना है तो स्वतंत्र रूप से निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों, समाजसेविकाओं या महिला अफसरों को ले जाते। अफसरों की पत्नियों से कौन सा महिला सशक्तिकरण होगा।

- अकेले अफसरों का जाना स्टडी टूर में परिवर्तित हो जाता है, लोग यह मानते हैं कि वह वहां से स्टडी करके आएंगे तो उसे प्रदेश में लागू करेंगे। लेकिन अफसर का पत्नी सहित जाना यह इंगित करता है कि वह अफसर किसी भी विषय पर स्टडी करने नहीं बल्कि सैर सपाटे के लिए गए हैं।

-पत्नियों को ले जाने के साथ महिला सशक्तिकरण की बात कही जा रही है, कल को यह बात भी उठेगी कि बच्चों का सशक्तिकरण करो तो अफसर अपनी पत्नियों के साथ बच्चो को भी ले जाएंगे। इसके बाद वृद्धों के सशक्तिकरण की बात उठेगी तो अफसर अपने माता पिता को भी ले जाएंगे। यानि पूरा सशक्तिकरण होगा अफसर का , आम जनता तो बस राशन,कुकिंग गैस सिलेंडरों के लिए लाइनों में लगकर धक्के खाती रहेगी।

-जिस तरह आईएएस अफसरों को विदेश यात्रा में पत्नियों को ले जाने की सुविधाएँ मिल रही हैं उस तरह की सुविधाएं आम अफसरों तथा कर्मचारियों को मिलेगी यह सवाल विदेश यात्रा से लौटने के बाद प्रदेश के कर्णधार अफसरों से पूछा जाएगा।

-पत्नियों की यात्रा से बुद्दिजीवी वर्ग यह सवाल भी उठा रहा है कि क्या आगे चलकर ऐसा भी हो सकता है कि देश की सरहद पर सैनिकों के साथ लड़ने औऱ साथ देने के लिए पत्नियों को भेजा जाए थानों तथा मैदानी निरीक्षण में पुलिस कर्मियों औऱ अधिकारियों के साथ उनकी पत्नियां भी मौके पर जाएं। इससे औऱ ज्यादा महिला सशक्तिकरण हो जाएगा।

-कुल मिलाकर अफसरों और उनकी पत्नियों की विदेश यात्राओं को जस्टीफाई करने के लिए अफसरकुनबा कई बेशर्मी भरे तर्क दे सकता है लेकिन आम जनता यह पूछना चाहती है कि जिस अफसर को जनता अपनी गाढ़ी कमाई से तनख्वाह देती है उसका समय क्या सपरिवार विदेश यात्राओं में बरबाद होना चाहिए या फिर उसे प्रदेश की जनता के हित में अपनी ड्यूटी करना चाहिए।