17 February 2019



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डीजीपी की तौहीन कर रही है महिला एसपी
10-10-2012
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कहते हैं कि पुलिस को सही लोगों की मदद के लिए सिंघम बनकर काम करना चाहिए लेकिन मध्यप्रदेश के कई जिलों की पुलिस सिंघम के बजाय चिंगम बनकर काम कर रही है यानि गरीबों और सही लोगों का खून चूसो औऱ रसूखदार लोगों के सामने नतमस्तक हो जाओ। महिलाओं के गले से सोने की चेन लूटने तथा छेड़छाड़ के मामलो में भोपाल पूरे प्रदेश में नंबर वन बनने की ओर अग्रसर है। इसकी सीधी सी वजह है निकम्मे पुलिस अधिकारियों को जिलों की कमान। इसमें भी कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें सिफारिशों की दम पर दो-दो पोस्टिंग मिली हुई हैं। प्रदेश के गृह मंत्री भी इस मामले में निरीह साबित हो रहे हैं। कुछ अदने से अधिकारी उन्हें ही आंखे दिखा रहे हैं।राजधानी भोपाल की जहां रोजाना कोई न कोई महिला चेन स्नेचिंग या रैप का शिकार बनती है। उस पर भी हालात ये हैं कि एक नाकाबिल अफसर मोनिका शुक्ला जैसों को ट्रैफिक और क्राइम ब्रांच दोनों की कमान दे दी गई है। वजह बताई जाती है सीएम हाउस का हस्तक्षेप ,बेचारे डीजीपी नंदन दुबे भी इनका कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि यह सरे आम धमकी देती हैं कि डीजीपी उनका क्या बिगाड़ लेंगे। वाकई सही है। आपको याद होगा दो साल पहले किसानों ने पूरे शहर को जाम कर अस्त-व्यस्त कर दिया था जिससे सरकार और पुलिस की भारी थू-थू हुई इसके बाद भी महिला एएसपी मोनिका को हटाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। खुद डीजीपी भी दोषी अफसरों पर अब तक कार्रवाई नहीं कर पाए। अब ट्रैफिक के हाल इतने खराब है कहीं भी कोई छोटी से रैली निकले शहर जाम हो जाता है। ट्रैफिक इंतजाम सिर्फ सीएम हाउस तक भी हो तो भी समझ में आता है पिछले दिनों तो अन्ना के आंदोलनकारी सीएम हाउस तक भी पहुंच गए पर मोनिका पर कृपा बनी रही। उन्हें ट्रैफिक के साथ क्राइम ब्रांच भी दे दिया जैसे भोपाल पुलिस में कोई काबिल अफसर बचा ही नहीं है। फर्जी मामलों तथा घटिया ट्रैफिक के मारे परेशान है और उधर सुधार के नाम पर सिर्फ जमकर वसूली चल रही है। यह मोनिका शुक्ला का ही खेल था कि प्रदेश के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता के एक रिश्तेदार के पीछे कुछ ट्रैफिक पुलिसकर्मी चिंगम की तरह चिपक गए औऱ केस बना डाला। क्या ऐसा संभव है कि एक छोटा पुलिसकर्मी, एसपी मोनिका के समझाने के बाद भी गृह मंत्री से उलझे। अततः बेचारे गृह मंत्री को ही कहना पड़ा कि केस गलत था। राजधानी सहित इंदौर में सभी कारों से ब्लैक फिल्म उतारने का काम जारी हैलेकिन भोपाल में महिला एसपी मोनिका शुक्ला रसूखदारों तथा मंत्रियों की गाड़ियों से ब्लैक फिल्म नहीं उतरवा पा रही हैं। मीडियाकर्मी पूछते हैं तो कहेंगी कि आप हमारी मदद करो तो हमारे लिए काम आसान हो जाएगा। यानि सब कुछ मीडिया के भरोसे । अधिकारी खाली तनख्वाह लेने के लिए हैं। यही बात उन्हें कैमरे पर बोलने के लिए कही गई तो वे कैमरा तो दूर फोन उठाने के लिए भी राजी नहीं हुईं। ट्रैफिक पुलिस में लगे कर्मचारी भेदभावपूर्ण कार्रवाई कर रहे हैं। जब प्रदेश के गृह मंत्री के खिलाफ ही पुलिसकर्मी चिंगम बनकर चिपक सकते हैं तो आम आदमी के बारे में आप कल्पना कर सकते हैं कि पुलिस क्या कर रही होगी। यहां सवाल यह भी उठता है कि यदि कहीं कोई गड़बड़ी हो रही है तो आला अफसर क्यों धृतराष्ट्र की तरह आंखें बंद किए बैठे हैं क्या उन्हें नजर नहीं आता कि छोटे अधिकारियों तथा कर्मचारियों को अनुशासन में चलना चाहिए।