21 February 2019



प्रादेशिक
कानून के पैरोकार शिवराज की भी बदनामी कराई भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने
12-10-2012

भोपाल पुलिस की कायरता की पोल सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस ने तब खोली जब हजारों बीजेपी कार्यकर्ता बिना हेलमेट के राजधानी की सड़कों पर मोटरसाइकिलों पर नजर आए और कानून तोड़ते नेताओं की चापलूसी करतीं ट्रैफिक एसपी मोनिका शुक्ला औऱ उनका स्टाफ धृतराष्ट्र बने कानून तोड़ते लोगों को देखते रहे। पुलिस ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की कानूनी कार्ऱवाई भी नहीं की जिससे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का मजाक भी बना। साथ ही कानून कायदों से चलने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंहचौहान की भी पुलिस ने जमकर बदनामी कराई गई । भोपाल की ट्रैफिक पुलिस की एसपी मोनिका शुक्ला, जो दंभ भरती हैं नियम से कार्रवाई करने का। गुरुवार को पुलिस के सामने ही हजारों बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बिना हेलमेट के राजधानी की सड़कों पर धींगामस्ती की लेकिन न तो मोनिका ये हिम्मत दिखा सकीं कि इन कार्य़कर्ताओं का चालान बनवाती न उनके मातहत किसी चिंगम टाईप के पुलिसकर्मी ने नियम तोड़ने वाले कार्यकर्ताओं का चालान बनाया। है , न ,सुप्रीम कोर्ट का मजाक उड़ाने वाली भोपाल की कायर पुलिस की नेताओं की चापलूसी का शानदार बीजेपी कार्य़कर्ताओं के ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का नजारा भोपाल के भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को तो नजर नहीं आया लेकिन आम जनता औऱ कांग्रेस को तो दिखा। कांग्रेस को दिखा तो कांग्रेसी भी एमपीनगर थाने पहुंचे औऱ नियमों का उल्लंघन करने वाले बीजेपी कार्य़कर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई लेकिन डरपोक पुलिस ने तब भी किसी के खिलाफ प्रकरण दर्ज नहीं किया। अब आपको समझ में आ गया होगा कि क्यों राजधानी भोपाल की पुलिस सबसे निकृष्ट मानी जाती है। क्यों एसपी मोनिका शुक्ला जैसे घटिया पुलिस अफसर राजनेताओं की चापलूसी में नियमों का दरकिनार करते हैं। जाहिर है सवाल में ही जवाब शामिल है। दरअसल भोपाल सहित कई शहरों के कई पुलिस अधिकारी और कर्मचारी दोहरे चरित्र वाले हैं । इन्हें इतनी भी लाज नहीं आती कि जिस जनता की गाढ़ी कमाई से ये वेतन लेते हैं कम से कम उसके सामने तो न्याय के साथ काम करें।  नेताओं के चरणों में भले ही कायरों की तरह लेट जाएं लेकिन कम से कम माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का तो लिहाज करें।