16 February 2019



राष्ट्रीय
तेल मंत्रालय में फेरबदल कॉरपोरेट 'खेल'?
30-10-2012
सरकार का कहना है कि मंत्रालय में फेरबदल प्रधानमंत्री की इच्छा से होता है. क्या कॉरपोरेट दबाव का शिकार हुए हैं जयपाल रेड्डी? रविवार को किए गए केंद्रीय मंत्रीमंडल के विस्तार और फेरबदल में जयपाल रेड्डी को तेल मंत्रालय से हटाकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया है जिस पर कई सवाल उठ रहे हैं. माना जाता है कि खुद जयपाल रेड्डी भी इस फैसले से खुश नहीं हैं. विपक्ष ने भी इस फैसले पर सरकार की आलोचना की है और कई सवाल उठाए हैं हालांकि सरकार का कहना है कि मंत्रालय में फेरबदल प्रधानमंत्री की मर्ज़ी अनुसार होता है. भाजपा के नेता वेंकैया नायडू ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, \'\'एक औद्योगिक ग्रुप ने प्रधानमंत्री पर दबाव बनाया क्योंकि वो एक ग्रुप के हित में काम नहीं कर रहे थे. सरकार पर यह आरोप लग रहा है. सरकार और कांग्रेस को लोगों को जबाव देना चाहिए.\'\' अरविंद केजरीवाल की \'इंडिया अगेंस्ट करप्शन\' ने तो उनके मंत्रालय बदले जाने पर सरकार पर निशाना साधा और कहा, \'\'जयपाल रेड्डी बहुत ईमानदार मंत्री माने जाते हैं. उन्हें हटा दिया गया...सरकार शायद यह संदेश देना चाहती है कि जो जितना भ्रष्टाचार करेगा, उसकी उतनी ही तरक्की होगी. और अगर ईमानदारी से चलोगे तो तुम्हारी खैर नहीं है.\'\' रेड्डी से सम्सय ऐसा माना जाता है कि रेड्डी के कार्यकाल के दौरान किए गए कई फैसले रिलायंस सहित कुछ तेल कंपनियों के हित में नहीं थे. हालांकि रिलायंस सहित कई कंपनियों के थिंक-टैंक माने जाने वाले ऑबज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक संजय जोशी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, \'\'सिर्फ रिलायंस ही इस क्षेत्र में खिलाड़ी नहीं है. कई और भी हैं जिनके साथ समस्याएं आई हैं.\'\' उन्होंने कहा, \'\'कॉंट्रैक्ट की परिभाषा को लेकर सरकार और उद्योग में अंतर आ गया था. यह सेक्टर के लिए बहुत अच्छा नहीं था. अगर अनावश्यक कानूनी अड़चने हर चीज़ में आने लगती हैं तो समस्या आती है.\'\' उधर कांग्रेस पार्टी और सरकार ने ऐसी अटकलों को खारिज किया है और कहा कि मंत्रालय में बदलाव प्रधानमंत्री की इच्छा से होता है.