24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
युवा हाथों में चीन की बागडोर
15-11-2012
चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से बुधवार को अपेक्षाकृत युवा नेताओं को पार्टी की केंद्रीय समिति में शामिल करने की घोषणा की गई। इनमें शी जिनपिंग और ली केकियांग भी हैं, जिनके राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री चुने जाने की संभावना है। ये अगले 10 वर्षो तक चीन का नेतृत्व करेंगे। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी [सीपीसी] की 18 वीं केंद्रीय समिति गुरुवार को अपने पहले पूर्णकालिक सत्र में पोलित ब्यूरो, राजनीतिक ब्यूरो की स्थायी समिति और पार्टी महासचिव का चुनाव करेगी। पार्टी की एक सप्ताह तक चली 18वीं कांग्रेस में सीसीपी की 17वीं केंद्रीय समिति की रिपोर्ट और सीपीसी के संविधान में संशोधन प्रस्ताव पारित किया गया। 2307 प्रतिनिधियों के समक्ष सीपीसी के महासचिव और राष्ट्रपति हू जिंताओ ने कहा, \'नई केंद्रीय समति में उम्रदराज नेताओं की जगह कम उम्र वाले नेता चुने गए हैं। काग्रेस में लिए गए निर्णय ऐतिहासिक महत्व के हैं, जो समाजवाद का मार्गदर्शन करने में अहम भूमिका निभाएंगे। जिंताओ के कार्यकाल को भारत-चीन संबंधों में सुधार वाला माना जाता है। हालांकि सीमा विवाद और जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को नत्थी वीजा मुद्दे सुलझाए जाने बाकी हैं। नई दिल्ली में 26 नवंबर को होने जा रही रणनीतिक-आर्थिक वार्ता को इसी सुधार का हिस्सा बताया जा रहा है। वेन और जिंताओ दोनों ही भारत आते रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत के जटिल मुद्दों पर बातचीत होती रही है। उनकी जगह लेने वाले नए नेता इस मामले में अनुभवहीन हैं। हालांकि भारत का कहना है कि वे पिछले पांच वर्षो से संगठनात्मक नेतृत्व का हिस्सा थे और भारत के खास मामलों से भली-भांति परिचित हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन जल्द ही बीजिंग दौरे पर जाने वाले हैं। केंद्रीय समिति सीपीसी की सबसे महत्वपूर्ण क्रियात्मक इकाई है। इसके अधिकांश सदस्य पार्टी, सरकार और सेना के महत्वपूर्ण व्यक्ति होते हैं। इसमें 370 से भी अधिक सदस्य हैं। 1949 में \'पीपुल्स रिपब्लिक\' की स्थापना के बाद से ही सीपीसी चीन पर शासन कर रही है। सीपीसी विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है। इसका दावा है कि इसके आठ करोड़ से अधिक सदस्य हैं। केंद्रीय समिति चीन में सबसे शक्तिशाली लोगों की नियुक्ति करती है।