19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
आयरलैंड में नहीं हुआ अबॉर्शन, भारतीय डॉक्टर की गई जान
15-11-2012
भारतीय मूल की एक डेंटिस्ट का गर्भपात नहीं होने के चलते मौत हो गई। वजह थी कि उस देश में अबॉर्शन यानी गर्भपात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा होना। दरअसल, घटना की शिकार 31 वर्षीय डॉक्टर सविता हलपानवर को 17 सप्ताह का गर्भ था। लेकिन इस बीच आई कॉप्लीकेशन की वजह से उसकी जान मुश्किल में आ गई लेकिन आयरलैंड में उसका अबॉर्शन करने से सभी डाक्टरों ने साफ इंकार कर दिया। इसकी वजह थी आरयलैंड कैथोलिक देश होने की वजह से यहां पर अबॉर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया हुआ है। यहां पेट में पल रहे बच्चे में धड़कन रहते गर्भपात नहीं कराया जा सकता। यह घटना पिछले माह 28 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल गैलवे में घटी थी। वहां के एक अखबार आइरिश टाइम्स के खुलासे के बाद यह बुधवार को प्रकाश में आई। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले की जाच शुरू कर दी है। अखबार के मुताबिक सविता को यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उसका मिसकैरिज हो चुका था। खून में जहर फैल रहा था। उसकी जान बचाने के लिए यह जरूरी था कि उसका गर्भपात किया जाए। लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने इस अबॉर्शन को सिर्फ इसलिए मना कर दिया कि उस देश का कानून इसकी इजाजत नहीं देता है कि भ्रूण में धड़कन सुनाई देने तक महिला का गर्भपात किया जाए। इसका नतीजा सविता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। डाक्टरों की इस लापरवाही की वजह से सविता की मौत हो गई। सविता के पति प्रवीण हलपानवर गैलवे के बोस्टन साइंटिफिक इंस्टीट्यूट में इंजीनियर हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सविता ने कई बार गुहार लगाई कि उसका मिसकैरिज हो चुका है। इसलिए गर्भ गिरा दिया जाए। तीन दिन तक वह दर्द से तड़पती रही। लेकिन डॉक्टरों ने हाथ लगाने से मना कर दिया। अस्पताल में सविता ने कई बार कहा कि वह न तो आयरलैंड की नागरिक है और न ही कैथोलिक। वह हिंदू है। ऐसे में उसपर आयरलैंड का कैथोलिक कानून कैसे लागू हो सकता है। डॉक्टरों ने ये दलील अनसुनी कर दी। इस घटना के बाद यहां पर यह बहस चल पड़ी है कि आखिर किसी देश में डाक्टरों के लिए किसी की जान बचाना ज्यादा अहम है या फिर उस देश का कानून। एक ब्रिटिश अखबार ने एक आइरिश डिप्टी पैटरिक नल्टी के हवाले से खबर दी है कि अब समय आ गया है जब अबॉर्शन से संबंधित कानून में संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अपनी पार्टी से शुरुआत करने की भी बात कही है। अखबार के मुताबिक सविता की मौत के बाद उसके परिवार वाले अब सरकार पर मुकदमा दायर करने पर भी विचार कर रही है। उनका कहना है कि सविता का गर्भपात कर उसकी जान को बचाया जा सकता है, लेकिन डाक्टरों ने ऐसा नहीं किया।