16 February 2019



राष्ट्रीय
IIM बेंगलुरू में महिला अधिकारी से यौन उत्पीड़न,एक साल के बाद भी जांच जारी
28-11-2012
देश का प्रतिष्ठित मैनेजमेंट स्कूल आईआईएम बैंगलुरू गंभीर विवाद की वजह से छाया हुआ है। संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर एक महिला मेडिकल अफसर ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। करीब एक साल बाद भी अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। इस मामले में मैनेजमेंट की तरफ से बस जांच का भरोसा दिया जा रहा है। एक तरफ जहां महिला अधिकारी को नौकरी गंवानी पड़ी है वहीं, सीएओ को अभी तक निलंबित तक नहीं किया गया है। यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला अधिकारी के मुताबिक, 2009 से सीएओ परेशान कर रहा था। इसके गलत बर्ताव के खिलाफ इस महिला ने आईआईएम बैंगलुरू के जीएसएम में 2011 में शिकायत दर्ज कराया था। करीब एक साल बाद इस शिकायत को इस साल जनवरी में पटल पर लाया गया। जबकि एक साल के दौरान आरटीआई अधिनियम के तहत इस मामले में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जानकारी मांगी। सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा पूछा जाता रहा कि इस शिकायत पर अभी तक क्या कार्रवाई हुई है। लेकिन हर बार सीएओ द्वारा इसे जांच जारी है कह कर टाल दिया जाता है। इस मामले में इतना समय बीत जाने के बाद भी कम्यूनिकेशन के हेड एन.ब्रिंगी देव ने मेल पर जवाब देते हुए बताया कि अभी जांच जारी है, जांच पूरी होते ही सभी संबंधित को इसकी जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी। लिंग भेदभाव या उत्पीड़न संबंधित मामले की कमेटी जीएससी में शिकायत दर्ज कराये महिला अधिकारी को करीब तीन साल हो गये हैं। महिला अधिकारी आईआईएम में अस्थायी रुप से काम कर रही थी।  इसे 2009 से स्थायी किया गया। दो साल प्रोबेशन के लिए इसे सीएओ से साथ रखा गया। जल्द ही सीएओ ने महिला से सेक्शुअल डिमांड रखने लगा। जब इस तरफ आईआईएम मैनेजमेंट का ध्यान महिला ने दिलाया तो सीएओ और नाराज हो गया और परेशान करने लगा। 8 नवंबर 2010 को महिला ने मौखिक रूप से जीएससी के सामने शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद फिर 15 दिसंबर 2010 को मैनेजमेंट के सामने मामला उठाया। इसके बाद मार्च 2011 में प्रशासनिक विभाग के डीन को रिपोर्ट करने को कह दिया गया। इसके बावजूद शत्रुतापूर्ण माहौल बन गया, जिससे की वहां काम करना मुश्किल हो गया। कई वरिष्ठों ने उसे नौकरी छोड़कर खुद ही प्रैक्टिस करने की सलाह दी। सभी सहयोगियों ने जीएससी में लिखित शिकायत करने की भी सलाह दी। इन सभी लोगों की बातों पर अमल करते हुए महिला ने सीएसओ के खिलाफ लिखित में जूलाई 2011 में शिकायत दर्ज करा दी। इसके बाद अचानक 30 जनवरी 2012 को एक मेल मिला कि अगले दिन ही आपकी नौकरी समाप्त की जाती है। महिला अधिकारी ने बताया कि अब संस्थान छोड़ने के अलावा इसके पास कोई चांस नहीं था। अपने टर्मिनेशन के खिलाफ महिला कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां से केस हार गयी। महिता बताती है कि सबसे ज्यादा आश्चर्य उसे इस बात की है कि  जांच के दौरान सीएओ को आज तक निलंबित तक नहीं किया गया है। तमाम महिला संगठनों द्वारा इस शिकायत पर क्या परिणाम हुआ इसकी मांग करने के बाद भी आज तक मामला बस जांच पर टिका हुआ है।