19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
मिस्त्र में संविधान के नए इस्लामी मसौदे को मंजूरी
01-12-2012
मिस्त्र की संविधान सभा ने शुक्रवार को गरमा गरम बहस के बाद इस्लामिक मूल्यों की प्रमुखता वाले संविधान के नए मसौदे को मंजूरी दे दी है। उदारवादी पार्टियों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि देश में अभिव्यक्ति और धर्म की स्वतंत्रता को सीमित किए जाने की कोशिश की जा रही है। इस्लामी चरमपंथियों के प्रभुत्व के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए उदारवादी, वामपंथी सदस्यों और चर्च के प्रतिनिधियों ने खुद संविधान सभा से पहले ही अलग कर लिया था। मिस्त्र के सरकारी टेलीविजन के मुताबिक, संविधान के नए मसौदे में इस्लाम को देश का धर्म और शरिया सिद्धांतों को कानून का प्रमुख आधार बताया गया है। मिस्त्र में लोकतांत्रिक बदलाव की मांग को देखते हुए इस्लामिक नेतृत्व वाली संविधान सभा ने यह मसौदा राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी को भेजा है। राष्ट्रपति सार्वजनिक अनुमोदन के लिए इस पर जल्द ही जनमत संग्रह करा सकते हैं। पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के अधीन संविधान के मसौदे से इसमें कुछ खास परिवर्तन नहीं आया है। इसमें कहा गया है कि मिस्त्र के ईसाईयों और यहूदियों के लिए ईसाई और यहूदी धर्म ही कानून का प्रमुख स्त्रोत होगा। असेंबली ने मसौदे के तहत एक नया प्रावधान जोड़ते हुए कहा है कि शरिया मामलों में मस्जिद और विश्वविद्यालय, धर्मशास्त्र से जुड़े अधिकारियों से परामर्श लिया जाए। अब राष्ट्रपति के कार्यकाल को चार साल का कर दिया गया है और एक व्यक्ति महज दो ही बार राष्ट्रपति बन सकता है।