22 February 2019



प्रादेशिक
कलेक्टर की इजाजत से ही बदलेगा धर्म
03-12-2012
मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर पैसों के दम पर धर्मपरिवर्तन कराने वालों को जेल भेजने की तैयारी में हैं। अब कलेक्टर की अनुमति के बगैर धर्म परिवर्तन कराने और करने वालों पर आर्थिक दंड के साथ-साथ उन्हें जेल की हवा भी खानी होगी। हालांकि राज्य सरकार ने इसके पहले भी 26 जुलाई 2006 को इस कानून में बदलाव करने के लिए विधानसभा में विधेयक पारित किया था, लेकिन 18 सितंबर 2009 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इसे अनुमति देने से इन्कार कर दिया था। प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में धर्मपरिवर्तन के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए राच्य सरकार धर्म-स्वातं˜य [संशोधन] विधेयक को 2006 में पारित कर तत्कालीन राच्यपाल बलराम जाखड़ को भेजा था। उन्होंने इस विधेयक पर अपनी अनुशंसा कर इसे राष्ट्रपति को भेज दिया। विधेयक के संशोधित प्रावधान में संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 का उल्लंघन होने के कारण तत्कालीन राष्ट्रपति ने वर्ष 2009 में इस विधेयक को अनुमति देने से इन्कार करते हुए इसे तत्कालीन राच्यपाल रामेश्वर ठाकुर को वापस भेज दिया था। इसके बाद 3 सितंबर को 2009 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आनन-फानन में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई इस बैठक में तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश साहनी, महाअधिवक्ता आरडी जैन, प्रमुख सचिव विधि एवं गृह सचिव उपस्थित थे। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए धर्म परिवर्तन कानून में संशोधन को जरूरी बताते हुए इसके लिए महाअधिवक्ता को कानूनी रास्ता ढूंढकर ऐसा प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए कि जिसमें सभी प्रावधान शामिल भी हो जाएं और संविधान का उल्लंधन भी न हो। महाअधिवक्ता जैन ने धर्म परिवर्तन कानून के मूल नियम 5 के बाद 5 [क] में भी बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया, जिसके अनुसार धर्म परिवर्तन करने वाले इच्छुक व्यक्ति को स्वयं 15 दिन पहले कलेक्टर और एसपी को सूचना देनी होगी, इस कानून का पालन न करने पर जेल और अर्थदंड की सजा का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। विधि विभाग ने इस प्रस्ताव को विधि सम्मत न मानते हुए इसे वापस कर दिया। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की विशेष शाखा ने गुजरात राच्य के फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट 2003 के आधार पर प्रस्ताव बनाकर विधि विभाग को भेजा, जिसे विधि ने मान्य कर लिया है। संभावना जताई जा रही है कि राच्य सरकार इसी सत्र में एक बार फिर नए सिरे से धर्म परिवर्तन कानून 1968 में बदलाव करने का विधेयक ला सकती है।