19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
नेपाल की पार्टियां एक बार फिर हुई फेल
07-12-2012
नेपाल में राजनीतिक पार्टिया एक बार फिर आम सहमति नहीं बना सकीं। इसके साथ ही राष्ट्रपति राम बरन यादव द्वारा सरकार बनाने के लिए तय अंतिम तारीख भी पार हो गई है और देश राजनीतिक एवं संवैधानिक संकट बरकरार है। देश की चारों प्रमुख पार्टियों सीपीएन-माओवादी, संयुक्त मधेसी मोर्चा, नेपाल काग्रेस [एनसी] और सीपीएन-यूएमएल के बीच बुधवार देर रात तक चली बैठक में कोई हल नहीं निकल पाया। इस बैठक में प्रचंड, सुशील कोइराला, झालानाथ खनल और बिजय कुमार गछादर शामिल हुए थे। देश में इस समय सीपीएन-माओवादी और मधेसी मोर्चा की सरकार है। हालाकि, प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई का कहना है कि सत्ता में बदलाव से पहले सभी पार्टियों को आपसी विवाद सुलझा लेने चाहिए। भट्टराई संविधान सभा को भंग कर आम चुनाव की घोषणा कर चुके हैं। एनसी के महासचिव प्रकाश मान सिंह ने बताया कि संविधान से जुड़े कुछ मुद्दों पर सत्तारूढ़ दल अभी समझौता चाहते हैं। इसलिए बैठक बेनतीजा रही। इससे पहले नेपाल काग्रेस ने नए प्रधानमंत्री के लिए पार्टी अध्यक्ष सुशील कोइराला का नाम आगे बढ़ाया था। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि राष्ट्रपति यादव एक बार फिर से राजनीतिक दलों को आम सहमति बनाने के लिए कुछ और दिन देंगे। राष्ट्रपति द्वारा एक हफ्ते पहले अंतिम तारीख बढ़ाए जाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच कई दौर की वार्ताएं हुई। लेकिन, नतीजा कुछ नहीं निकला। नेपाल में अगले साल आम चुनाव प्रस्तावित हैं। इससे पहले भट्टराई ने कहा था कि वह 22 नवंबर को आम चुनाव करा देंगे लेकिन आखिरकार राजनीतिक आम राय नहीं बनने पर ऐसा नहीं हो सकता। नेपाल में चले गृह युद्ध के बाद चुनी गई संविधान सभा कई प्रयासों के बावजूद देश को संविधान नहीं दे सकी।