24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
श्रीलंका में मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग पर रोक
22-12-2012

कोलंबो। श्रीलंका की अपीलीय अदालत ने पहली महिला मुख्य न्यायाधीश शिरानी भंडारनायके के खिलाफ संसदीय समिति की ओर से लाए गए महाभियोग पर शुक्रवार को रोक लगा दी है। इस संबंध में दाखिल याचिका का निस्तारण करते हुए अदालत ने न्यायमूर्ति भंडारनायके के खिलाफ कार्यवाही को गैरकानूनी पाया है। संसद के स्पीकर और संसदीय समिति के सदस्यों को जारी नोटिस में तीन जनवरी से पहले अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। साथ ही पूछा गया है कि मामले की सुनवाई होने तक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ कार्यवाही पर क्यों न रोक लगा दी जाए। अदालत ने यह कदम भंडारनायके की ओर से महाभियोग को निरस्त करने के लिए 19 दिसंबर को दाखिल याचिका पर उठाया है। भंडारनायके के वकील ने अदालत में कहा कि संसदीय समिति के निष्कर्ष निरर्थक हैं और इसमें कोई दम नहीं है। इसलिए समिति की सिफारिशें लागू नहीं की जानी चाहिए। श्रीलंका में सत्तारूढ़ यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम एलायंस के सांसदों की ओर से लाए गए महाभियोग में भंडारनायके के खिलाफ शामिल 14 में से तीन आरोपों को संसदीय समिति ने सही पाया था। इन तीन मामलों में वित्तीय अनियमितता, संपत्ति की घोषणा नहीं करने तथा एक निवेशक कंपनी के प्रकरण में दिलचस्पी दिखाना शामिल है। 54 वर्षीय मुख्य न्यायाधीश भंडारनायके ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए महाभियोग के खिलाफ हमला बोला था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह संसद में उपस्थित नहीं होंगी और न कोई सफाई देंगी। न्यायालय ने संसद में लाए गए महाभियोग को आज नए तरीके से परिभाषित किया। कहा कि पूर्व में जारी अदालती नोटिसों को नजरअंदाज करते हुए महाभियोग लाकर संसद अपनी सर्वोच्चता साबित करना चाहती है। श्रीलंका सरकार ने न्यायालय के आदेश पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि इससे सरकार के विकास कार्यो की गति प्रभावित होगी। मुख्य न्यायाधीश पद से इस्तीफा देने का भंडारनायके पर दबाव बनाने के लिए सरकार ने मीडिया के जरिये अभियान भी चला रखा है।