21 February 2019



प्रादेशिक
पीएससी के खिलाफ अब फिर होगी अपील
22-12-2012
राज्यसेवा परीक्षा में धांधली की शिकायत कर रहे उम्मीदवारों की नाराजगी हाई कोर्ट के फैसले के बाद भी बरकरार है। कोर्ट के सामने पीएससी द्वारा स्वीकारी गलती पीड़ित उम्मीदवारों के गले नहीं उतर रही। उम्मीदवारों का संशय अब भी परीक्षा के 15 जवाबों पर बना हुआ है। इस बीच पूरे परिणाम की समीक्षा करने की मांग के साथ आयोग के खिलाफ अगली कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू हो चुकी है। 20 फरवरी 2011 को पीएससी ने राज्यसेवा प्रारंभिक परीक्षा 2010 आयोजित की थी। पीएससी द्वारा जारी उत्तर सूची के 21 सवाल-जवाब पर उम्मीदवारों ने आपत्ति ली थी। आयोग में सुनवाई नहीं हुई तो उम्मीदवारों ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के सामने पीएससी ने गलती स्वीकारी और पांच सवालों के कुल 8 नंबर याचिकाकर्ताओं को देने का निर्णय हुआ। पीएससी से पीड़ित ऐसे उम्मीदवारों को फैसले का लाभ नहीं मिल रहा जिन्होंने सही जवाब दिए लेकिन कोर्ट में नहीं पहुंचे। 2009 में छत्तीसगढ़ पीएससी का एक जवाब गलत साबित हुआ था। उस आधार पर 771 उम्मीदवारों का परिणाम बदला गया। मप्र पीएससी में स्केलिंग पद्धति लागू है। इस पद्धति में एक नंबर का असर पूरे परिणाम पर पड़ता है ऐसे में राज्य सेवा परीक्षा का पूरा परिणाम ही बदला जाना चाहिए। गलत को फायदा क्यों पीएससी की गड़बड़ी से पीड़ित उम्मीदवार गलत जवाब देने के बाद भी मुख्य परीक्षा में चयनित हो चुके उम्मीदवारों को बाहर नहीं किए जाने से भी नाखुश हैं। उम्मीदवारों के अनुसार आखिर पीएससी ऐसे उम्मीदवारों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है। गलत जवाब देने के बाद भी चयन होना और सही जवाब देने वालों का बाहर हो जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। इस बीच परीक्षा पर गहराए विवाद के दौरान पीएससी द्वारा अपनाए रवैये पर भी सवाल खडे़ हो गए हैं। पीएससी ने दो बार राज्य सेवा परीक्षा के पदों में बढ़ोतरी की है। बढ़ोतरी की घोषणा मुख्य परीक्षा होने के बाद की गई। अंतिम बढ़ोतरी बीते साह ही की गई है जबकि पीएससी मुख्य परीक्षा का परिणाम तैयार होने की बात कह रही है। ऐसे में आयोग का रवैया संदेह पैदा कर रहा है। इस बीच पीएससी अब भी कुछ गलत जवाबों को सही करार दे रहा है। पीएससी ने पंचायती राज को 1994 में पारित हुआ माना जबकि सही जवाब 1993 है। इसी तरह पीएससी प्रदेश में सिर्फ बॉक्साइट खनिज की उपलब्धता मान रहा है जबकि एस्बेस्टास भी प्रदेश में मिल रहा है। उम्मीदवार अगली अपील के लिए इन गलत जवाबों को भी आधार बना रहे हैं। हाई कोर्ट ने गलत जवाबों के आधार पर 8 नंबर का लाभ दिया है। इन नंबरों का फायदा 12 याचिकाकर्ताओं को भी पूरी तरह नहीं मिल सकेगा। दरअसल 12 याचिकाकर्ताओं में बमुश्किल 5 उम्मीदवार ऐसे हैं जो 8 या कम नंबरों से मुख्य परीक्षा में चुने जाने से वंचित हैं। यानी शेष याचिकाकर्ताओं को भी 8 नंबर मिल भी जाएं तो वे मुख्य परीक्षा के योग्य नहीं हो सकेंगे। उन्हें लाभ तब ही मिलेगा जब पूरे परिणाम की ही समीक्षा हो।