22 February 2019



राष्ट्रीय
गैंगरेप मामले पर दोबारा दर्ज होगा पीड़िता का बयान
25-12-2012
गैंगरेप मामले पर पुलिस और प्रशासन के बीच हो रही खींचतान के चलते अब पीड़िता का बयान दोबारा दर्ज करने का फैसला लिया गया है। अस्पताल सूत्रों ने यह जानकारी दी है। बयान दर्ज करने वाली एसडीएम की शिकायत के बाद दोबारा बयान दर्ज करने का फैसला लिया गया है। इस मामले पर दिल्ली पुलिस के रवैये से लग रहा कि वह न तो मामले की संवेदनशीलता को समझ रही है और न ही दोषियों को कड़ी सजा दिलाने को लेकर गंभीर है। आम आदमी की रक्षा का दावा करने वाली पुलिस ही इस बार आरोपों के घेरे में है और ये आरोप खुद दिल्ली सरकार के एक बड़े अधिकारी ने लगाए हैं। दिल्ली की एसडीएम ऊषा चतुर्वेदी ने दिल्ली प्रशासन के एडिशनल कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर शिकायत की है कि पीड़ित लड़की का बयान दर्ज करते वक्त दिल्ली पुलिस ने उन पर दबाव बनाने की कोशिश की। एसडीएम ने जो शिकायती पत्र लिखा है उसके मुताबिक जब वो पीड़ित का बयान दर्ज कराने के लिए सफदरजंग अस्पताल पहुंची तो वहां पर दिल्ली पुलिस के तीन आला अधिकारी मौजूद थे। उनके पुलिस जवानों का भारी अमला भी मौजूद था। एसडीएम की चिट्ठी के मुताबिक वहां पर एक डीसीपी और दो एसीपी मौजूद थे। तीनों अफसरों ने अपने मुताबिक पीड़ित का बयान लेने के लिए उनपर दबाव बनाया। जब उन्होंने इनकार किया तो उनके साथ बदसलूकी की गई। एसडीएम के मुताबिक दिल्ली पुलिस के अधिकारी जो बातें पुछवाना चाहते थे वो पीड़ित के असल बयान से काफी अलग है। एसडीएम ने अपनी चिट्ठी में शिकायत की है कि मैं बलात्कार पीड़ित का बयान दर्ज करने सफदरजंग अस्पताल गई। वहां पर डीसीपी साउथ छाया शर्मा, एसीपी वसंत विहार और एसीपी डिफेंस कॉलोनी मौजूद थे। उनके साथ भारी पुलिस बल भी मौजूद था। उन लोगों ने सवालों की फेहरिस्त दी और कहा कि मैं पीड़ित का बयान लूं। मुझे वारदात की रात के बारे में जो बताया गया और मैंने पीड़ित का जो बयान दर्ज किया उन दोनों में काफी फर्क है। उन लोगों ने मुझ पर दबाव बनाने की कोशिश की। एसडीएम ने कहा कि अधिकारी उन पर बयान की वीडियो रिकार्डिग करने भी जिद कर रहे थे और इस कारण काम में काफी विलंब हुआ। उन्होंने कहा कि वीडियोग्राफी मना करने पर उनके साथ बदसलूकी की गई। लेकिन जब पीड़िता की मां और डॉक्टरों ने ऐसा करने से मना किया तब जाकर वो माने। आखिरकार मैं लड़की का बयान तब दर्ज कर पाई जब मैंने पुलिसवालों को सख्ती से कमरे से बाहर जाने को कहा। वहीं एसडीएम की शिकायत पर गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय खुद अधिकारियों पर लग रहे आरोपों की जांच करेगा। गौरतलब है कि इस मामले में शीला दीक्षित ने गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर एक उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने चिट्ठी लिक होने की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस वक्त बयान दर्ज कराया गया था वहां पर दिल्ली पुलिस के कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं थे। सभी प्रक्रिया एसडीएम ने खुद फोलो की हैं। पुलिस पर आरोप लगाना गलत है।