19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
मिस्र में पहली बार जनता ने चुना संविधान
27-12-2012
होस्नी मुबारक के तानाशाही शासन से 30 साल बाद मुक्ति पाने वाली मिस्र की जनता ने जनमत संग्रह के दौरान संविधान के प्रस्तावित मसौदे को स्वीकार लिया है। पिछले एक साल से अशांत चल रहे मध्य पूर्व के इस देश की जनता ने इतिहास में पहली बार संविधान चुना है। अब तक उन पर संविधान सेना या किसी तानाशाह ने थोपा था। दो चरणों में पड़े मतदान में देश की लगभग दो तिहाई जनता ने \'हां\' पर वोट किया। हालांकि, जनमत संग्रह के नतीजों के बाद देश में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। विरोधियों का कहना है कि नए संविधान ने देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचाया है।न्यायिक चुनाव आयोग ने मंगलवार रात सरकारी चैनल नील टीवी पर घोषणा की कि जनता ने 15 और 22 दिसंबर को पड़े वोट में दो तिहाई बहुमत के साथ संविधान के नए मसौदे को स्वीकार कर लिया है। चुनाव आयोग की घोषणा के तुरंत बाद राजधानी काइरो में प्रदर्शनकारी जगह-जगह सड़कों पर आ गए। उन्होंने टायरों में आग लगा दी और ट्रैफिक रोका। प्रधानमंत्री हिशाम कंदील ने नए संविधान पर मुहर लगाने के लिए जनता को धन्यवाद दिया। इस्लामिक विचारधारा वालों की देश में यह लगातार तीसरी जीत है। संविधान के पक्ष में 63.8 फीसद और विपक्ष में मात्र 36.2 फीसद वोट पड़े। इसके बाद इस्लामिक झुकाव वाले देश के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी ने मंगलवार रात नए कानून पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति के प्रवक्ता यासिर अली ने बताया कि जनक्रांति के बाद देश को संविधान देने जैसे अहम काम का पहला चरण पूरा हो गया है। मुर्सी ने आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब मुर्सी समर्थकों के दबदबे वाली संविधान सभा नए संविधान का गठन करेगी।