21 February 2019



प्रादेशिक
मिसाइल परियोजना में खरीदे घटिया बैग
05-01-2013
सीबीआइ भोपाल ने देश की मिसाइलों में प्रयुक्त होने वाले खास तरह के बैग की खरीद में घोटाले की भनक लगते ही गोपनीय तौर पर जांच शुरू की है। ये बैग देश की बहुचर्चित पिनाक, आकाश, नाग और त्रिशूल जैसी मिसाइलों में उपयोग होने वाले प्रोपेलेंट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के काम आते हैं। इटारसी स्थित रक्षा मंत्रालय की केमिकल फैक्ट्री से प्रोपेलेंट पाउडर खास तरह के रबर बैगों में भरकर एम्यूनीशन फैक्ट्री पुणे अथवा खमरिया जबलपुर भेजा जाता है। यह पाउडर देश की मिसाइल परियोजना का खास घटक है। प्रोपेलेंट मिसाइल अथवा बंदूक से छूटने वाली गोली की गति को बढ़ाने के काम आता है। बहरहाल, सीबीआइ ने बैग की खरीद से जुड़े रिकार्ड को खंगालना शुरू कर दिया है। आयुध निर्माणी के अफसरों से पूछताछ की जा रही है। बताया जाता है कि घटिया क्वालिटी के बैगों को अधिक कीमत देकर खरीद लिया गया। मामला रक्षा मंत्रालय से संबद्ध होने के कारण काफी संवेदनशील है। पुणे स्थित हाई एक्सप्लोसिव मैटेरियल रिसर्च लेबोरेटरी (एचइएमआरएल) ने बैगों की गुणवत्ता को हल्का बताया है। ये बैग कोलकाता की एक निजी कंपनी ने सप्लाई किए थे। इटारसी आयुध निर्माणी ने उक्त कंपनी से 1600 बैग खरीदे थे, प्रत्येक बैग की कीमत 8000 रुपये बताई गई थी। इस सौदे का भुगतान करीब सवा करोड़ रुपये किया गया, जबकि शिकायत है कि निर्धारित गुणवत्ता पर ये बैग खरे नहीं उतरे। मामला वर्ष 2007 का है। सीबीआइ अब मामले की पड़ताल में जुटी है। आयुध निर्माणी इटारसी में संबंधित शाखाओं से रिकार्ड निकलवाया जा रहा है। सीबीआइ एसपी (भोपाल) यतींद्र कोयल ने कहा, \'आयुध निर्माणी इटारसी में घटिया प्रोपेलेंट बैगों की खरीद का मामला प्रारंभिक जांच में लिया गया है। पूछताछ और रिकाडर््स की छानबीन चल रही है।\' जानिए, क्या है प्रोपेलेंट प्रोपेलेंट पाउडर मिसाइल में प्रयुक्त होने वाला ऐसा अति संवेदनशील केमिकल है जो कि मिसाइल को तेजी से घुमाकर आगे की ओर फेंक कर विस्फोटन की प्रक्रिया शुरू करता है और साथ ही मिसाइल की गति तेज कर देता है। इटारसी की केमिकल फैक्ट्री से यह पाउडर खास तरह के रबर बैगों में भरकर पुणे और जबलपुर सहित देश की अन्य आर्डेनेंस फैक्टरी में भेजा जाता है।