16 February 2019



राष्ट्रीय
पितृत्व विवाद में हाई कोर्ट ने दिया रोजाना सुनवाई का आदेश
07-01-2013
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी को युवक रोहित शेखर द्वारा अपना जैविक पिता बताए जाने से संबंधित मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को रोजाना सुनवाई का आदेश दिया हैं। एनडी तिवारी के मध्यस्थता के जरिए मामले को सुलझाने से हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए स्थानीय आयुक्त को प्राथमिकता के साथ दिन-प्रतिदिन आधार पर सुनवाई करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश तब आया जब 88 वर्षीय एनडी तिवारी के वकील ने मध्यस्थता से अदालत के बाहर मामले को सुलझाने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस बात की संभावना है कि चिकित्सकीय साक्ष्य शत प्रतिशत सही नहीं हों। न्यायमूर्ति मनमोहन ने सुनवाई के दौरान कहा, इस मामले को समाधान के लिए मध्यस्थता केंद्र ले जाना चाहिए क्योंकि डीएनए रिपोर्ट के रुप में चिकित्सकीय साक्ष्य स्पष्ट सुझाते हैं कि प्रतिवादी एनडी तिवारी याचिकाकर्ता रोहित शेखर के पिता हैं। एनडी तिवारी के वकील बहर उल बरकी ने अदालत के सुझाव को स्वीकार नहीं किया और दलील दी कि उनके मुवक्किल मुकदमा लड़ना चाहेंगे क्योंकि वैज्ञानिक सबूतों को अंतिम नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि यह लगभग निर्णायक हैं और ऐसा लगता है कि वह मध्यस्थता प्रक्रिया नहीं करना चाहते। अदालत ने सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विमला माकन से मामले में साक्ष्यों को दर्ज करने के साथ दिन-ब-दिन आधार पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया। माकन को मामले में स्थानीय आयुक्त नियुक्त किया गया है। अदालत ने कहा कि स्थानीय आयुक्त द्वारा 21 जनवरी से कार्यवाही शुरु की जाएगी। इस बीच अदालत ने तिवारी को चार सप्ताह के भीतर 46000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट देने को कहा, जो उन पर पूर्ववर्ती सुनवाई के दौरान हर्जाने के तौर पर लगाये गये हैं। हाईकोर्ट ने पिछले साल 27 जुलाई को मामले में डीएनए रिपोर्ट पढी थी, जिसके मुताबिक तिवारी को शेखर का जैविक पिता दर्शाया गया था। हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश की पीठ ने डीएनए रिपोर्ट पढी थी। इससे पहले एक खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के 19 जुलाई के फैसले के खिलाफ तिवारी की अपील को खारिज कर दिया था। आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल तिवारी ने एकल न्यायाधीश को डीएनए रिपोर्ट को गोपनीय रखने की तथा मामले में बंद कमरे में कार्यवाही करने की गुहार लगाई थी।