18 February 2019



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एक लाख से ज्यादा गाय के संरक्षण के लिए क्रियाशील है 591 गौ-शालाएँ
07-01-2013
मध्यप्रदेश में भारतीय नस्ल की एक लाख 3 हजार 615 गाय के लिए 591 गौ-शालाएँ सक्रिय है। ये गौ-शालाएँ वर्ष 2004 से निरंतर गौ-वंश का संरक्षण एवं संवर्धन कर रही है। इन गौ-शालाओं में 26 बायोगैस संयंत्र स्थापित है। गौ-मूत्र से औषधियाँ तैयार करने वाली गौ-शालाओं की संख्या 31 है। इसके साथ ही 85 ऐसी गौ-शालएँ भी हैं जहाँ जैविक खेती के लिए गोबर खाद तैयार की जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अक्टूबर 2004 से गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड को राज्य में प्रभावशील घोषित किया गया है। बोर्ड के कार्यों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर एक कार्य-परिषद तथा जिला स्तर पर जिला गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन समितियाँ गठित की गयी है। प्रदेश में गौ-वंश वध प्रतिषेध (संशोधन) अधिनियम 2010 भी प्रभावशील है। राज्य सरकार ने गाय की देशी नस्लों को प्रोत्साहन देने के लिए गोपाल पुरस्कार योजना भी प्रारंभ की है। गत वर्ष से शुरू हुई इस योजना से भारतीय उन्नत नस्ल के गौ-वंशीय पशुओं के पालन को बढ़ावा एवं अधिक दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिल रहा है। यह प्रदेश के सभी जिलों में क्रियान्वित की जा रही है। योजना सभी वर्ग के उन पशुपालक के लिए है, जिनके पास भारतीय नस्ल की गाय होने के साथ-साथ गाय का दुग्ध उत्पादन 4 लीटर प्रतिदिन या उससे अधिक हो। गोपाल पुरस्कार योजना में प्रत्येक जिले में सबसे अधिक दूध देने वाली भारतीय गौ-वंश नस्ल की गाय को 50 हजार का प्रथम तथा इसी क्रम में द्वितीय पुरस्कार 25 हजार और तृतीय पुरस्कार 15 हजार रुपये का दिया जा रहा है। जिला स्तर पर प्रथम, द्वितीय पुरस्कार प्राप्त पशुपालकों के आवेदन राज्य स्तर पर संकलित कर उनका परीक्षण राज्य स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है। परीक्षण के बाद राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार 2 लाख, द्वितीय पुरस्कार एक लाख एवं तृतीय पुरस्कार 50 हजार रुपये दिया जाता है। चालू साल से योजना में विकासखण्ड स्तर पर किया गया है। ब्लॉक स्तर पर योजना में 1449 पुरस्कार दिये जायेंगे।