15 February 2019



राष्ट्रीय
राहुल-मोदी के बीच चुनावी जंग का मैदान सज चुका है!
21-01-2013
जयपुर में राहुल गांधी को नंबर दो बनाया गया तो कांग्रेसियों का चेहरा गुलाबी हो गया। संवेदनाएं बटोरने में सक्षम दर्दनाक पारिवारिक इतिहास के सहारे राहुल ने सभी उपस्थित कांग्रेसियों के दिलों को झकझोर दिया। इधर कांग्रेस ने आगामी लोकसभा के लिए राहुल को अपनी कमान सौंपी तो उधर भाजपा में खलबली मच गयी। भाजपा किसके सहारे चुनावी नैया पार लगाएगी इसकी चर्चा आम से खास तक में होने लगी? भाजपा में पीएम पद की दौड़ में अफरा-तफरी मची है। पार्टी विद द डिफरेंस का चेहरा बिगड़ता जा रहा है। सत्ता के गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय भूमिका में नजर आ सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि भाजपा ने मोदी को चुनाव की कमान सौंपने की सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुजरात में लगातार तीसरी बार धमाकेदार जीत के बाद से ही यह कयास लगना शुरू हो गया था कि मोदी 2014 के आम चुनाव में पार्टी का चेहरा होंगे। चलो जी हम मान लेते हैं कि अब भाजपा मोदी मय होने वाली है। तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या नरेंद्र मोदी पर लगा 2002 का दाग लोगों के दिलों से साफ हो गया? सभी राजग के घटक दल मोदी को अपना नेता मान लेंगे? चलिए हम आपको मोदी की राह में पड़ने वाले चंद रोड़ें बता रहे हैं  मोदी की कंट्टर छवि यदि राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो बाबरी विध्वंस के बाद भाजपा की ऐतिहासिक लहर में भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली। लालकृष्ण आडवाणी भी वेटिंग पीएम ही रह गए। तो ऐसी हालत में भाजपा के लिए नरेंद्र मोदी को आगे करने की जोखिम लेना कहां तक उपयोगी होगा? इस समय पार्टी को ऐसे नेता की जरूरत है जो अपने वोट बैंक को संभालने के साथ ही दूसरों को रिझा सके। जैसे अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के लिए मुखौटे के रूप में थे। कांग्रेस की बदनाम छवि मुद्दा नहीं बन पाएगी यदि भाजपा मोदी को पीए कैंडिडेट घोषित करती है तो चुनाव में मोदी की दंगों से प्रभावित छवि ही मुद्दे बन जाएंगे। ऐसी हालत में कांग्रेस की बदनाम छवि, भ्रष्टाचार, महंगाई और विकास जैसे मुद्दे पीछे चले जाएंगे। इससे सीधा-सीधा फायदा कांग्रेस को होगा। बिदक जाएंगी कई सहयोगी पार्टियां नरेंद्र मोदी का भाजपा की तरफ से पीएम कैंडिडेट नाम आते ही राजग के कई घटक दल बिदक जाते हैं। एनडीए में शामिल जेडीयू तो मोदी का खुलेआम विरोध करती है। अगले लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी तृणमूल कांग्रेस, बीजेडी और एआईएडीएमके जैसी पार्टियों की तरफ भी उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है। लेकिन ये सभी पार्टियां मोदी के नाम पर समर्थन के लिए शायद ही राजी होंगी। मोदी का अड़ियल रवैया पार्टी में समकक्ष नेता मोदी के अड़ियल रवैये से परेशान रहते हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मोदी की जिद सबको साथ ले चलने में सबसे बड़ी दिक्कत है। आपकी राय। कौन है पीएम पद का योग्य उम्मीदवार और क्यों ? नरेंद्र मोदी या राहुल गांधी?