15 February 2019



राष्ट्रीय
मंत्री को खुश करने के चक्कर में फंसे अधिकारी
22-01-2013
मंत्री जी के नजदीकी सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को शायद अंदाजा नहीं था कि हर दांव सही नहीं बैठता। संयुक्त सचिव स्तर के एक अधिकारी ने मंत्री को खुश करने के लिए कैलेंडर छपवा लिए और अब वित्त विभाग के फंदे में फंस गए हैं। उन्होंने न सिर्फ क्षेत्रीय भाषा में जरूरत से ज्यादा कैलेंडर छपवाए, बल्कि अपने ही मंत्रालय के एक दूसरे विभाग एनएसएसओ की तुलना में दोगुनी कीमत अदा की। केंद्रीय सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीकांत जेना के गृह राज्य ओडिशा से ही आने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी घेरे में हैं। सूत्रों का कहना है कि उक्त प्रभावशाली अधिकारी ने मंत्री को खुश करने के लिए उड़िया भाषा में नए साल के 20 हजार और हिंदी में 30 हजार नए कैलेंडर छापने की मंजूरी दे दी। कीमत तय की गई प्रति कापी 92 रुपये। यानी लगभग 50 लाख रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। जबकि खुद जेना ने इसे कम कर उड़िया में सिर्फ 10 हजार कापी छापने का निर्देश दिया। मगर उससे पहले अधिकारी ने कैलेंडर छपवा लिया था। खुश करने के लिहाज से 12 पेज के हर पन्ने में प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी और मंत्री जी के फोटो भी छापे गए थे। बात इतनी ही नहीं है। वित्त विभाग ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि इसी मंत्रालय के दूसरे विभाग एनएसएसओ ने 45 रुपये प्रति कापी की दर से कैलेंडर छपवाए थे। वह कैलेंडर बांटा भी जा चुका है। फिर सरकार को मितव्ययता से बचने के निर्देश के बावजूद दूसरे विभाग ने 92 रुपये खर्च करने की क्यों सोची? लिहाजा बिल अटक गया है और साथ ही कैलेंडर भी। बताते हैं कि उक्त अधिकारी का प्रभाव इतना है कि मंत्रालय में कई फाइलें उनके हस्तक्षेप से आगे जाती हैं और रुकती भी हैं। शायद यही कारण था कि मंत्री की मंजूरी से पहले ही उन्होंने कैलेंडर छापने की मंजूरी दे दी थी।