16 February 2019



राष्ट्रीय
राजनाथ बने बीजेपी अध्यक्ष, कांग्रेस के खिलाफ कल से प्रदर्शन
23-01-2013
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को अपना पद गंवाना पड़ा और उनकी जगह पार्टी ने राजनाथ सिंह को नया अध्यक्ष चुन लिया है। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष पर का कार्यभार संभाल लिया है। अध्यक्ष बनते ही राजनाथ सिंह ने नितिन गडकरी की तारीफ में कसीदे पढ़ डाले। गडकरी को कर्मठ अध्यक्ष बताया। अध्यक्ष के पद को दायित्व के रूप में स्वीकार करने की बात राजनाथ सिंह ने कही। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में अध्यक्ष बना हूं। जनता और कार्यकर्ता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा। उन्होंने कांग्रेस सरकार को नाकाम ठहराते हुए आगामी लोकसभा 2014 के चुनाव में भाजपा नेतृत्व में सरकार बनने का दावा किया। उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान हालत के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। भाजपा कल से गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के खिलाफ पूरे देश में प्रदर्शन करेगी। उन्होंने शिंदे के बयान को वोट बैंक की राजनीति बताया है। शिंदे ने कहा था कि भाजपा और आरएसएस आतंकवाद फैला रहे हैं। राजनाथ सिंह वर्ष 2013 से 2015 तक के लिए निर्विरोध चुने गए। तालियों की गड़गड़ाहट में राजनाथ सिंह का कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। गडकरी ने राजनाथ सिंह को बधाई दी। नितिन गडकरी ने सभी कार्यकर्ताओं का पिछले तीन साल के कार्यकाल के दौरान समर्थन देने के लिए आभार दिया। गडकरी ने कहा कि उन्होंने पार्टी को मजबूत करने की कोशिश की। गडकरी ने कांग्रेस पर वार करते हुए कहा कि मेरे जरिए पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की गई। इससे पहले राजनाथ सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के घर मिलने पहुंचे। इसके बाद वह नितिन गडकरी के घर गए। दोनों नेता एक साथ आडवाणी के घर से निकले। बताया जा रहा है कि नितिन गडकरी ने ही राजनाथ सिंह के नाम का अध्यक्ष पद के लिए प्रस्ताव दिया था। खबर आ रही है कि राजनाथ सिंह गडकरी के साथ ही भाजपा मुख्यालय गए। भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में राजनाथ सिंह के नाम पर मुहर लग गई है। राजनाथ सिंह के नाम पर मुहर लगते ही बधाई संदेशों का सिलसिला जारी हो गया। भाजपा मुख्यालय पर नेताओं की भीड़ लगी है। राजनाथ सिंह के समर्थक काफी उत्साहित हैं। उधर गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी ने राजनाथ सिंह को भाजपा अध्यक्ष बनने की पहले ही बधाई दे दी। मंगलवार को पूर्ति ग्रुप की कंपनियों पर पड़े आयकर छापे के बाद गडकरी पर दबाव इतना बढ़ा कि उन्हें खुद ही रेस से बाहर होना पड़ा। उनकी जगह पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह को दोबारा अध्यक्ष बनाने पर रजामंदी हो गई है। मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के भाग्य ने एक बार फिर से करवट ले लिया। इस बार संघ के पास भी उनको बचाने का रास्ता नहीं था। दरअसल पूर्ति ग्रुप पर पड़े आयकर की छापेमारी ने भाजपा को इतना संशकित कर दिया कि पार्टी ने संघ को भी स्पष्ट कह दिया कि गडकरी के नेतृत्व में कोई भविष्य नहीं देखा जा सकता है। संघ की ओर से निर्देश मिलते ही गडकरी ने अपना इस्तीफा देकर राजनाथ के लिए रास्ता साफ कर दिया। दरअसल छापेमारी की खबर मिलते ही गडकरी के दूसरे कार्यकाल को लेकर भाजपा में खलबली मच गई। हालांकि गडकरी ने इस छापेमारी की निंदा करते हुए उसे सरकार की बदले वाली कार्रवाई बताया, लेकिन भाजपा नेताओं ने आनन-फानन में बैठक कर यह तय किया कि गडकरी से पीछा छुड़ाने में ही भलाई है। सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, एम वेंकैया नायडू और संघ प्रतिनिधि राम लाल सहित अन्य नेताओं की बैठक में 2009 तक पार्टी के अध्यक्ष रहे 61 वर्षीय राजनाथ सिंह की दावेदारी पर मुहर लगा दी। सिंह को भी संघ का करीबी माना जाता है। हताश-निराश गडकरी ने कहा कि वह आरोपों से तंग आकर त्यागपत्र दे रहे हैं और क्लीनचिट मिलने के बाद फिर लौटेंगे। गडकरी का इस तरह से अध्यक्ष पद के चुनाव मैदान से हटने के लिए विवश होना संघ के लिए भी झटका है, क्योंकि वह आरोप लगने के बावजूद उनका समर्थन करने में लगा हुआ था। उन्हें दोबारा अध्यक्ष बनाने को भाजपा का संविधान भी बदला गया था। हालांकि वरिष्ठ नेता आडवाणी गडकरी को दूसरा कार्यकाल देने के पक्ष में नहीं थे। मंगलवार को आडवाणी और गडकरी ने मुंबई के निकट एक कार्यक्रम में मंच साझा भी किया लेकिन दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई, जो यह बताने के लिए काफी था कि दोनों के बीच तनातनी बरकरार है। इस बीच, यशवंत सिन्हा ने भी चुनाव लड़ने के संकेत दे दिए थे। पूर्ति ग्रूप पर छापे और यशवंत के कदम ने पार्टी को दावेदार बदलने पर मजबूर कर दिया।