21 February 2019



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मछली-पालन से आया जीवन में सुधार (सफलता की कहानी)
30-01-2013

खण्डवा जिले के मोरटक्का के बेरोजगार अजय की आर्थिक स्थिति खराब होने के साथ-साथ उस पर परिवार के खर्च का बोझ भी था। एक बार उसे मोरटक्का में सहायक मत्स्य अधिकारी मिल गये। उसने अपनी परिस्थिति बतलाई तो उन्होंने अजय को आस-पास का कोई तालाब पट्टे पर लेकर मछली पालने की सलाह दी।

अजय ने बताया कि उसने 1.95 हेक्टेयर का मोरटक्का तालाब तीन साथी के साथ मछली-पालन के लिये 10 वर्षीय पट्टे पर लिया। शासन ने उसे 15 दिवसीय प्रशिक्षण देकर 25 हजार की सहायता दी। अजय ने वर्ष 2009-10 में 25 हजार फिशरलिंग तालाब में संचय कर चार-पाँच माह बाद थोड़ी मछली निकालना शुरू कर दिया। इस प्रकार तालाब से 1200 किलो मछली का उत्पादन हुआ, जिसे उसने बाजार में बेचा। लगभग 35 से 50 रुपये प्रति किलो बेची गई मछली से उसे लगभग 48 हजार रुपये का फायदा हुआ।

दूसरे साल 50 हजार फिशरलिंग का संचय हुआ जिससे उसे पुनः 80 हजार रुपये की आय हुई। इसके बाद प्रति वर्ष निरंतर 10 से 15 हजार रुपये की ज्यादा आय प्राप्त की जा रही है। अब उसके समूह द्वारा मछली-पालन से प्राप्त आय से हाथ-ठेला पर होटल व्यवसाय आरंभ किया गया है।