22 February 2019



राष्ट्रीय
मुशर्रफ को हो सकती है मौत की सजा!
02-02-2013
नई दिल्ली, [कमल कान्त वर्मा]। कारगिल युद्ध से जुड़े एक के बाद एक खुलासा होने के बाद से पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस युद्ध में सीधेतौर पर परवेज मुशर्रफ के शामिल होने और बेवजह का युद्ध देश पर थोपने को लेकर अब पाकिस्तान में इसको लेकर जांच कराने की मांग तेज हो रही है। यदि इस मांग को मान लिया जाता है और मुशर्रफ इसमें दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें फांसी की सजा तक हो सकती है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व डायरेक्टर जनरल जियाउद्दीन बट ने तो यहां तक कहा है कि मुशर्रफ के किसी भी बयान पर यकीन नहीं किया जा सकता है, उन्होंने हर बार आवाम को इस मुद्दे पर गुमराह किया है। उन्होंने एक सेमिनार में न सिर्फ मुशर्रफ की कारगुजारियों का जिक्र किया है बल्कि यहां तक कहा कि इस मामले में जांच होने के बाद मुशर्रफ को फांसी के फंदे से कोई नहीं बचा सकेगा। उन्होंने इस मामले में भारत की सराहना करके भी एक अनूठा काम कर डाला। उन्होंने कहा कि भारत में इसको लेकर कमिशन गठित किया गया लेकिन पाकिस्तान में इस तरह का कुछ नहीं होता है। उन्होंने रिटायर्ड कर्नल अशफाक हुसैन की किताब को मुशर्रफ के खिलाफ एक पूरी पुख्ता चार्जशीट भी करार दिया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों रिटायर्ड कर्नल अशफाक हुसैन ने अपनी किताब में खुलासा किया था कि जनरल परवेज मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध से पहले भारतीय सीमा के करीब ग्यारह किलोमीटर अंदर तक आ गए थे और वहां उन्होंने एक रात भी गुजरी थी। हुसैन ने अपनी इस किताब में परवेज मुशर्रफ द्वारा देश पर युद्ध लादने को भी अनुचित करार दिया है। उन्होंने कहा है कि पहले मुशर्रफ ने सीमा रेखा का उल्लंघन किया, फिर भारत से युद्ध किया और बाद में अपने ही फौजियों के शव पहचानने और लेने से मना कर दिया। मुशर्रफ के खिलाफ पाकिस्तान में लोग और विभिन्न राजनीतिक पार्टियां लामबंद होती दिखाई दे रही हैं। पिछले कई वर्षो से लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे परवेज मुशर्रफ को भी कहीं न कहीं इस बात का डर सता रहा है कि यदि वह देश वापस आ गए तो उन्हें सजा दी जा सकती है। यही वजह है कि वह अपनी देश वापसी को कई बार टाल चुके हैं। हालांकि परवेज मुशर्रफ ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। इन सभी से बेपरवाह मुशर्रफ ने भारत पर पाकिस्तान के ऊपर युद्ध थोपने और सीमा उल्लंघन तक का आरोप लगाया है। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर भी उनका और फौज का साथ न देने को लेकर अंगुली उठाई है। कारगिल युद्ध को लेकर परवेज मुशर्रफ जहां अपनी पीठ खुद ही ठोकते दिखाई दे रहे हैं वहीं उनके ही साथी अब उनके ऊपर सवाल उठाकर उन्हें कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। ऐसे में परवेज मुशर्रफ का लंदन से वापस आकर इन आरोपों का सामना करने का हौसला कम ही दिखाई दे रहा है। वहीं जिस तर्ज पर मुशर्रफ के खिलाफ और कारगिल युद्ध की जांच उठ रही है, उसको देखकर लगता है कि मुशर्रफ की मुश्किलें आने वाले समय में और अधिक बढ़ जाएंगी। यदि मांग के अनुरूप जांच हुई और वह दोषी पाए गए तो उन्हें इस मामले में फांसी की सजा तक हो सकती है।