21 February 2019



प्रादेशिक
विश्व बैंक द्वारा डीपीआईपी के बेहतर अमल की सराहना
04-02-2013

विश्व बैंक ने मध्यप्रदेश में जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना (डीपीआईपी) के द्वितीय चरण की मध्यावधि समीक्षा के दौरान परियोजना की बेहतर उपलब्धियों को सराहा है। बैंक के भारत स्थित कन्ट्री डायरेक्टर श्री ओनो रुहल ने मुख्य सचिव श्री आर. परशुराम को पत्र भेजकर डीपीआईपी के द्वितीय चरण में लक्षित ग्रामीण परिवारों की बेहतरी के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों और उपलब्धियों की प्रशंसा की है और बधाई दी है। परियोजना के द्वितीय चरण में विगत 3 वर्ष के निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया गया है और आजीविका गतिविधियों के योजनाबद्ध क्रियान्वयन से ग्रामीण हितग्राहियों के आर्थिक उत्थान और उनके जीवन-स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में सफल प्रयास हुए हैं। विशेषकर गरीब ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में व्यापक कामयाबी मिली हुई है।

विश्व बैंक के दल ने विगत 19 से 27 नवम्बर और 6 तथा 7 दिसम्बर की अवधि में परियोजना की मध्यावधि समीक्षा की थी। दल के सदस्यों ने परियोजना क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों का भ्रमण कर हितग्राहियों के जीवन में आये परिणाममूलक बदलाव को देखा था। दल के सदस्यों ने अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती अरूणा शर्मा और डीपीआईपी के परियोजना समन्वयक श्री एल.एम. बेलवाल सहित परियोजना दल के सदस्यों से भी लक्षित ग्रामों में गरीबी उन्मूलन के लिए जारी आजीविका संवर्धन गतिविधियों के संबंध में चर्चा की थी।

डीपीआईपी के द्वितीय चरण में अब तक 3 लाख 17 हजार 248 गरीब ग्रामीण महिलाओं को 27 हजार 564 स्व-सहायता समूह के माध्यम से जोड़कर आजीविका संवर्धन का कार्य किया गया है। परियोजना में गठित 3295 ग्राम उत्थान समितियाँ आजीविका संवर्धन गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इन प्रयासों से स्व-सहायता समूह के सदस्यों की आय में व्यापक इजाफा हुआ है। सदस्यों के साथ ही आजीविका क्लस्टर स्तर और प्रोड्यूसर कम्पनियों की वित्तीय स्थिति भी बेहतर हुई है। ग्रामीण युवाओं के स्व-रोजगार और कौशल उन्नयन के लक्ष्यों को भी सफलतापूर्वक हासिल किया गया है। ग्रामीण अंचलों में 229 रोजगार मेलों में 90 हजार से अधिक युवाओं ने भागीदारी की है। इनमें से 17 हजार 817 युवा को रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं।

स्व-सहायता समूहों की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के लिए बैंक लिंकेज के माध्यम से उन्हें जरूरी वित्तीय मदद मुहैया करवाई गई है। इस अवधि में आजीविका निवेश के रूप में कुल 193 करोड़ 20 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई गई है। इन महिलाओं द्वारा लगभग 18 करोड़ 75 लाख की राशि बचत के रूप जमा की गई है। साथ ही 3,182 समूहों को बैंक से जोड़ा जाकर 12 करोड़ 7 लाख रुपये से अधिक का बैंक लिंकेज कराया गया है। पूर्व की तुलना में बैंक लिंकेज के मामलों में दोगुनी वृद्धि हो चुकी है। स्व-सहायता समूह और सदस्यों को बचत के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ बैंक ऋण की अदायगी भी सुचारू रूप से हो रही है।

क्लस्टर स्तर पर समूहों के प्रथम फेडरेशन के रूप में सामुदायिक वित्तीय संगठन का गठन शिवपुरी जिले के पिछोर संकुल में किया गया है। परियोजना की पहल पर ग्रामीणों द्वारा 18 प्रोड्यूसर कम्पनी गठित की गई हैं। इनमें 15 कृषि आधारित, 2 दुग्ध व्यवसाय एवं 1 मुर्गीपालन कम्पनी शामिल हैं। इन कम्पनी में 46 हजार से अधिक शेयर होल्डर हैं। वित्तीय वर्ष 2011-12 में इन कम्पनियों का टर्न ओवर 40 करोड़ 81लाख रुपये से अधिक का रहा है। इन कम्पनियों के पदाधिकारियों एवं शेयर होल्डर में लघु एवं सीमांत किसान तथा गरीब एवं वंचित वर्ग की महिलाएँ शामिल हैं।