16 February 2019



राष्ट्रीय
मोदी से ईयू की नाराजगी खत्म
08-02-2013
 लगभग 11 साल पहले गुजरात दंगों के कारण नरेंद्र मोदी से नाराज यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने नरमी के संकेत दिए हैं। आज से ठीक एक माह पहले जर्मनी के राजदूत के नेतृत्व में ईयू का एक प्रतिनिधिमंडल मोदी से लंच पर मिला था, जो कि कुछ दिन पहले ही चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। पिछले माह 7 जनवरी को जर्मन राजदूत माइकल स्टेनर के चाणक्यपुरी स्थित आवास में एक सफेद रंग की एंबेसडर कार पहुंची। इस कार में थे नरेंद्र मोदी। मोदी ने वहां भारत में ईयू के राजदूत जोआओ क्राविन्हो और ईयू के अन्य देशों के राजदूतों के साथ लगभग दो घंटे बिताए। लंच में मोदी को गुजरात में हुए 2002 में हुए दंगों पर कई तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। मोदी ने सभी सवालों का उत्तर बड़ी सहजता से दिया। उन्होंने राजनयिकों को आश्वस्त किया कि भविष्य में 2002 के दंगों का दोहराव नहीं होने दिया जाएगा। मोदी ने राजनयिकों को अपने सुशासन मॉडल और देश के बारे में अपने विचार और योजनाओं पर अपना दृष्टिकोण रखा।मोदी की यह दंगों के बाद ईयू प्रतिनिधिमंडल के साथ पहली बैठक थी। इसके साथ ही ईयू का मोदी को लेकर चला आ रहा बहिष्कार भी खत्म हो गया। इससे तीन माह पहले गांधीनगर में ब्रिटिश उच्चायुक्त सर जेम्स बेवन ने मोदी से मुलाकात की थी। इसी मुलाकात से ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि ईयू ने मोदी का बॉयकाट खत्म कर दिया है। एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र ने बताया कि यह अनौपचारिक मुलाकात थी। अब हम लोग मोदी के साथ संबंध स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा महत्वपूर्ण यह है कि ब्रिटिश और डैनिश राजनयिकों की तरह ईयू राजदूत मोदी से अहमदाबाद जाकर नहीं मिले। इसके विपरीत वे हमसे आकर मिले। एक अन्य राजनयिक सूत्र ने कहा कि हमने तीन कारणों से उन्हें लंच पर आमंत्रित करने का निर्णय लिया-वह तीसरी बार चुनाव जीते, उन्हें राजनीतिक वैधता मिल गई और उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका निभाने की मंशा जाहिर कर दी है। अब हम मोदी की और अनदेखी नहीं कर सकते।