17 February 2019



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राशन कार्ड की संख्या के आधार पर खाद्यान्न आवंटित हो
14-02-2013

खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री पारस जैन ने केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश को बीपीएल राशन कार्डों की संख्या के आधार पर खाद्यान्न उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया है। श्री जैन ने कहा कि वर्तमान में जितने राशन कार्डों के आधार पर खाद्यान्न मिलता है, वह संख्या के आधार पर पर्याप्त नहीं है, शेष खाद्यान्न मध्यप्रदेश सरकार को उपलब्ध करवाना पड़ता है। श्री जैन आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक संबंधी संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों पर राज्यों के खाद्य मंत्रियों की बैठक में बोल रहे थे। बैठक में केन्द्रीय खाद्य और सावर्जनिक वितरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. के.वी.थॉमस भी उपस्थित थे।

श्री पारस जैन ने स्थायी समिति की अनुशंसाओं पर मध्यप्रदेश का अभिमत व्यक्त करते हुए कहा कि विधेयक में ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम 75 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 50 प्रतिशत हितग्राहियों की संख्या सीमांकित की है। मध्यप्रदेश का अभिमत है कि हितग्राहियों की संख्या पर कृत्रिम सीमा नहीं हो। ऐसा होने से कई पात्र लोग छूट जायेंगे तथा इसका क्रियान्वयन कठिन होगा। उन्होंने कहा कि बेहतर यह होगा कि पात्रता का मापदण्ड निर्धारित किया जाये तथा पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिले।

श्री जैन ने प्रत्येक हितग्राही को 5 किलोग्राम अनाज प्रतिमाह देने की अनुशंसा पर कहा कि इसे 7 किलोग्राम प्रति हितग्राही किया जाना चाहिये। उन्होंने समिति के इस प्रस्ताव को अनुचित ठहराया कि कोई राज्य चाहे तो इससे अधिक आवंटन दे सकता है, जिसका वित्तीय भार राज्य को ही वहन करना होगा। श्री जैन के अनुसार इसका पूरा खर्च केन्द्र सरकार द्वारा ही वहन किया जाये। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में स्पष्ट नहीं है कि राज्य खाद्य आयोग, जिला शिकायत निवारण कार्यालय आदि की स्थापना का व्यय कौन वहन करेगा। उन्होंने कहा कि यह व्यय केन्द्र सरकार ही वहन करे। श्री जैन ने एक विकल्प के रूप में विधेयक में उल्लेखित शिकायत निवारण व्यवस्था के अन्तर्गत मध्यप्रदेश की लोक सेवा गारंटी अधिनियम की व्यवस्था को अपनाने का सुझाव भी दिया।

श्री पारस जैन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एक्ट के क्रियान्वयन के बाद अधिक खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। ऐसी में खाद्यान्न उपार्जन की मौजूदा समस्याओं को दूर किया जाना चाहिये। मध्यप्रदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत ई-उपार्जन प्रणाली पर होने वाला पूरा व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है। इस नवाचार को अनुदान मिलना तो दूर, उपार्जन व्यवस्था में जो समस्याएँ हैं, उन्हें भी केन्द्र द्वारा दूर नहीं किया जा रहा है। श्री जैन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये आवश्यक अमले का प्रावधान किया जाए तथा मनरेगा की तरह इसके लिये भी राशि की व्यवस्था प्रशासकीय मद में हो।

श्री पारस जैन ने कहा कि उचित मूल्य की दुकानों को ग्राम पंचायत स्तर पर सुदृढ़ किया जाये और प्रत्येक दुकान या ग्राम पंचायत के लिये गोदाम निर्माण हो तथा भारत सरकार अनुदान दे। श्री जैन ने वास्तविक राशन कार्ड की संख्या के आधार पर भारत सरकार से खाद्यान्न का आवंटन उपलब्ध करवाने की माँग भी रखी। समय-समय पर एडहॉक आवंटन देने से यह स्पष्ट नहीं होता कि वास्तविक मासिक आवंटन कितना है। उन्होंने एडहॉक आवंटन की प्रक्रिया को समाप्त करने तथा माह फरवरी तक यह स्पष्ट करने को कहा कि अगले वित्तीय वर्ष में कुल कितना आवंटन राज्य को मिलेगा। श्री जैन ने अपने उद्बोधन में विधेयक को लागू करने में मानव संसाधन, आधारभूत संरचना, जीपीएस सिस्टम, कम्प्यूटरीकरण, परिवहन, उचित मूल्य की दुकान का कमीशन आदि का व्यय भी भारत सरकार द्वारा ही वहन करने का अभिमत दिया।