15 February 2019



राष्ट्रीय
देशव्यापी हड़ताल से धीमी पड़ी जिंदगी की रफ्तार
20-02-2013
श्रमिक संगठनों के आह्वान पर बुधवार से शुरू हुई दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन देश के कई इलाकों में हिंसा की खबर है। हरियाणा के अंबाला में श्रमिक संगठन एटक के पदाधिकारी नरेंद्र सिंह की तब मौत हो गई जब वह एक तेज रफ्तार बस को रोकने का प्रयास कर रहे थे। नोएडा के फेज 2 में आंदोलनकारियों ने वाहनों को आग लगाते हुए कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की। सेक्टर 82 और सेक्टर 63 में भी एक फायर ब्रिगेड, एक कार, एक बस फूंके जाने और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की खबर है। कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के नजदीक हड़तालियों और पुलिस के बीच टकराव की खबर है। वहां पर बल प्रयोग करके हड़तालियों को खदेड़ा गया। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा सहित देश के अन्य भागों में भी हड़ताल के व्यापक प्रभाव की खबर है।

हड़ताल के दौरान दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में सबसे ज्यादा तोड़फोड़ और आगजनी हुई। सैकड़ों श्रमिकों की भीड़ ने एकजुट होकर फेज 2 के होजियरी कांप्लेक्स की फैक्ट्रियों पर हमले किए। पुलिस बल की कमी के चलते कुछ घंटे तो वहां स्थिति पूरी तरह उपद्रवियों के हाथ रही। उन्होंने जिस फैक्ट्री पर चाहा, उस पर पथराव किया और जिस गाड़ी को चाहा उसे तोड़ा व उसमें आग लगाई। जब तक पुलिस सक्रिय हुई तब तक इलाके में दसियों लाख का नुकसान हो चुका था। इस दौरान कई उन फैक्ट्रियों पर भी हमले किए गए, जिन्हें हड़ताल के मद्देनजर बंद रखा गया था। पुलिस उपद्रवियों की तलाश कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस शासित बंगाल में हड़ताल का मिला-जुला असर देखा गया। ममता बनर्जी सरकार की सख्ती के चलते सरकारी महकमों में उपस्थिति सामान्य दिनों की तरह ही रही, बाजारों में दुकानें भी खुली दिखाई दीं। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम के चलते राज्य में रेल व हवाई यातायात सामान्य रहा लेकिन सड़कों पर आवागमन में कमी देखी गई। राज्य सचिवालय राइटर्स बिल्डिंग में अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति शत प्रतिशत रही। राजधानी दिल्ली में टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों के एक वर्ग के हड़ताल पर रहने के कारण आवागमन सुविधाएं प्रभावित दिखीं। दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के कर्मियों के एक वर्ग के हड़ताल पर रहने की वजह से डीटीसी बसों के नियमित परिचालन में बाधा आई।

बिहार में समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, सिवान, सासाराम, आरा, बक्सर, मुंगेर, दरभंगा, भागलपुर व बेगूसराय में ट्रेनें रोकी गईं। जबकि पटना में धरना देकर कई स्थानों पर सड़क यातायात बाधित किया गया। झारखंड की कोयला खदानों और ज्यादातर कारखानों में भी कामकाज ठप रहा। उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में भी हड़ताल का मिला-जुला असर रहने की खबर है। खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूंजीनिवेश के विरोध, वेतनवृद्धि तथा कुछ अन्य मांगों को लेकर आहूत इस हड़ताल के चलते पूरे देश की सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों और जीवन बीमा निगम के कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। बड़ी संख्या में कारखाने भी ठप रहे। इसके चलते करीब दस हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अंदाजा है।

नोएडा में हिंसक हुआ भारत बंद, आगजनी

नोएडा [जागरण संवाददाता]। भारत बंद के दौरान बुधवार को नोएडा में बंद समर्थकों ने जबरदस्त उपद्रव किया। कई स्थानों पर पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई। फेज-दो में आधा दर्जन फैक्ट्रियों में आगजनी के साथ-साथ पांच सौ से अधिक कंपनियों में तोड़फोड़ की गई। फैक्ट्रियों के बाहर भी बंद समर्थकों ने आगजनी की। उपद्रवियों ने दर्जनों वाहनों के शीशे तोड़े और एक दर्जन से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कंपनियों में घुसकर कर्मचारियों से मारपीट भी की गई। छह घंटे तक फेज-दो इलाके में कोहराम मचा रहा।

उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने के साथ हवाई फायर भी करने पड़े। हालांकि, पुलिस हवाई फायर करने से इन्कार कर रही है। आगजनी, तोड़-फोड़ व संपत्ति के नुकसान का आंकलन लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये किया गया है। शाम के बाद स्थिति नियंत्रित हुई। एडीजी एनसीआर, मेरठ कमिश्नर से लेकर आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए।

अधिकारियों को एकाएक हिंसा पर उतारू हुई भीड़ के पीछे गहरी साजिश नजर आयी। डीएम ने पूरी घटना में साजिश की बात कह मजिस्ट्रेट जांच कराने का आदेश दिया है।

बुधवार सुबह से ही नोएडा फेज-दो में होजरी कांप्लेक्स की अधिकांश फैक्ट्रियों में काम चल रहा था। करीब नौ बजे सुबह बंद समर्थकों ने फैक्ट्रियों को बंद कराना शुरू किया और बाहर निकले मजदूरों की भीड़ सड़क पर जुट गई। देखते ही देखते भीड़ अनियंत्रित हो गई और कंपनियों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। महिला कर्मचारियों से बदतमीजी भी की गई।

सुबह दस बजे के बाद पूरा फेज-दो इलाका रणभूमि में तब्दील हो गया। होजरी कांप्लेक्स में मदरसंस सहित आधा दर्जन फैक्ट्रियों में आगजनी की गई। पुलिस से कई बार झड़पें हुईं। बंद समर्थकों ने कंपनी के सामने खड़े वाहन, पुलिस जिप्सी तथा अग्निशमन वाहन को आग के हवाले कर दिया। फेज-दो इलाके में मचे कोहराम के बाद पीएसी के साथ गाजियाबाद से भी भारी पुलिस बल बुलाया गया। दिन भर हुई मारपीट व हिंसा में आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। इनमें पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। फेज-दो के अलावा, नोएडा सेक्टर-63, 57, 58, 59, 64, 65 व 67 में भी फैक्ट्रियों पर पथराव किया गया। कई फैक्ट्रियों के शीशे तोड़ डाले। दोपहर तक उपद्रवियों का तांडव चलता रहा। इसके बाद जब पुलिस ने पीएसी के साथ कमान संभाली, तब जाकर शहर शांत हुआ। दोपहर बाद औद्योगिक सेक्टरों की सड़कें सुनसान रहीं। सिर्फ पुलिस के जवान ही गश्त करते नजर आए।

जांच के लिए डीएम एमकेएस सुंदरम् ने मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम गठित की है। इनमें एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, उप श्रमायुक्त शामिल हैं।

एसएसपी शलभ माथुर का कहना है कि स्थानीय इंटेलीजेंस की चूक हुई है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों को चिन्हित किया जाएगा। फेज-दो का क्षेत्र पूरी तरह से पुलिस के नियंत्रण में है। पुलिस की कई टीमें देर रात तक उपद्रवियों की तलाश में छापे मार रही हैं। बंद बृहस्पतिवार को भी है। इसके मद्देनजर आला अधिकारी बृहस्पतिवार तक नोएडा में ही कैंप करेंगे।

सुनियोजित साजिश के तहत दिया गया घटना को अंजाम

नोएडा। नोएडा में बुधवार को हुई घटना अचानक नहीं हुई थी। यह पूर्व नियोजित साजिश थी। वजह, उपद्रवियों के निशाने पर वे कंपनियां भी थी, जो अभी बनकर चालू नहीं हुई हैं और कुछ ऐसी कंपनियों में भी तोड़-फोड़ की गई, जो लंबे अरसे से बंद पड़ी हैं। हड़ताल के पहले ही दिन जिस तरह से शहर के कुछ चुनिंदा औद्योगिक इलाकों में तोड़-फोड़ और आगजनी हुई, उससे साफ है कि साजिश है।