19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
ईरान-पाक पाइपलाइन पर जरदारी ने अमेरिका को दिखाई आखें
04-03-2013
पाकिस्तान ने ईरान-पाक पाइपलाइन परियोजना पर अमेरिका के विरोध को खारिज करते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि दुनिया की कोई ताकत इसे रोक नहीं सकती। जरदारी ने कहा कि किसी को भी इस प्रोजेक्ट में अड़ंगा लगाने का अधिकार नहीं है। राष्ट्रपति ने लाहौर स्थित अपने घर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र है। पाइपलाइन परियोजना पर आगे बढ़ने का निर्णय देशहित में लिया गया है। ईरान के शहर छाबहर में 11 मार्च को भव्य कार्यक्रम के जरिए इसका उद्घाटन किया जाएगा। अमेरिकी विरोध के सवाल पर जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान स्वतंत्र निर्णय ले सकता है। देश की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह समझौता किया गया है। परियोजना का विरोध कर रहे लोग समय के साथ इसकी उपयोगिता को समझते हुए समर्थन करने लगेंगे। पिछले हफ्ते अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पेट्रिक वेंट्रेल ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा था कि इस परियोजना पर प्रतिबंध लागू हो सकते हैं। यह पाकिस्तान के हित में है कि वह प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली गतिविधियों से दूर रहे। हमें लगता है कि हम पाकिस्तान की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए हरसंभव मदद कर रहे हैं। जरदारी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अमेरिका से बात करेंगे। राष्ट्रपति ने ग्वादर पत्तन का प्रबंधन चीन को सौंपे जाने के निर्णय का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारत की चिंताएं गैरजरूरी हैं। देश में होने वाले आम चुनाव पर उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र मजबूत हाथों में है। देश के खिलाफ काम कर रहे लोगों के मंसूबे सफल नहीं होंगे। वह पीएमएल-एन की ओर इशारा कर रहे थे। मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक, आतंकी संगठन लश्कर ए झांगवी के सहयोगी अहले सुन्नत वल जमात के पीएमएल-एन ने आने वाले चुनाव के लिए हाथ मिला लिया है। अब पंजाब सरकार झांगवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से बच रही है। जरदारी ने कहा कि आम चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र होंगे। राष्ट्रपति कार्यालय को 1990 में गुलाम इशाक खान के कार्यकाल से विवादित निर्णयों के लिए जाना जाने लगा है। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं 2013 का इशाक खान नहीं बनूंगा। जो भी पार्टी चुनाव जीत कर आएगी सत्ता उसी को सौंपी जाएगी।