18 February 2019



प्रादेशिक
हमीदिया-सुल्तानिया में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाई
04-03-2013
हड़ताल के तीसरे दिन भी जूनियर डाक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) व पुलिस-प्रशासन के बीच बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला है। अपने साथियों के साथ मारपीट के आरोपियों पर डाक्टर प्रोटेक्शन एक्ट लगाने की मांग को लेकर जूडा अड़ा हुआ है। जूडा की हड़ताल की वजह से मरीजों की दिक्कतें बढ़ती ही जा रही हैं। रविवार को ओपीडी नहीं होने के बाद भी मरीजों को इलाज के लिए घंटों भटकना पड़ा। हड़ताल समाप्त करने को लेकर रविवार सुबह डीन कक्ष में एसपी अरविंद सक्सेना, एडीएम उमाशंकर भार्गव, प्रभारी डीन डा. भानु दुबे, अस्पताल अधीक्षक डा. डीके पाल व जूनियर डाक्टरों के बीच बातचीत हुई। इसमें जूडा को हड़ताल खत्म करने की हिदायत दी गई है। उन्हें एक दिन का समय दिया गया है। इसके बाद अगर जूडा काम पर नहीं लौटा तो सोमवार से उन पर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। संचालक चिकित्सा शिक्षा डा. एससी तिवारी ने भी मरीजों की परेशानी को देखते हुए जूडा को काम पर लौटने के लिए कहा है। उधर, जूनियर डाक्टर चार नामजद आरोपियों समेत मारपीट करने वाले अन्य लोगों पर डाक्टर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है। इस एक्ट के तहत अस्पताल में डाक्टर पर हमला होने पर कार्रवाई की जाती है। रविवार को छुट्टी की वजह से कम मरीज आए इसके बाद भी मरीजों को घंटे भर में इलाज मिला। बेगमगंज से आए एक बच्चे राजेन्द्र के पिता ने बताया कि राजेन्द्र के लीवर में सूजन व दर्द है। हमीदिया की इमरजेंसी में डाक्टरों को दिखाया तो उन्होंने पीडियाट्रिक वार्ड में रेफर कर दिया गया। यहां पर पहले से इतनी भीड़ थी कि राजेन्द्र को एक घंटे बाद डाक्टरों ने देखना शुरू किया। सिर्फ इमरजेंसी मरीजों का एडमीशन सुल्तानिया अस्पताल में भी जूनियर डाक्टरों की हड़ताल की वजह से मात्र जरूरी मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। बाकी मरीजों को बाद में आने की सलाह दी जा रही है। साथ ही कई मरीजों को डिस्चार्ज भी कर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ सीजर आपेरशन ही हो रहे हैं। न के बराबर हो रही जांचें -पैथालाजी विभाग के डाक्टरों ने बताया कि हड़ताल के पहले रोजाना करीब पांच सौ सैंपल जांच के लिए आते थे, लेकिन अब लगभग सौ नमूने ही आ रहे हैं। वजह यह कि जांच कराने की सलाह जूनियर डाक्टर ही देते थे, लेकिन उनकी हड़ताल की वजह से डाक्टर जांच ही नहीं लिख रहे हैं।