22 February 2019



राष्ट्रीय
डीएसपी हत्या: अब भी अनसुलझे अनगिनत सवाल
06-03-2013
प्रतापगढ़ के वलीपुर गांव में ग्राम प्रधान और उनके भाई के साथ ही सीओ कुंडा जियाउल हक की हत्या फिलहाल रहस्य के कोहरे में है और कई ऐसे अनसुलझे सवाल हैं जिन पर पुलिस जवाब देने की स्थिति में नहीं है। मसलन सीओ को किस असलहे से गोली मारी गई? ग्राम प्रधान सुरेश यादव को किसने मारा? सीओ की हत्या पहले हुई या सुरेश की? क्या सुरेश की मौत पुलिस की गोली से हुई? इन अनसुलझे सवालों के जवाब में अपर पुलिस महानिदेशक [कानून-व्यवस्था] अरुण कुमार का जवाब सिर्फ इतना भर है कि बिना विवेचना पूरी हुए कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। मृतक सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने प्रतापगढ़ से लेकर देवरिया तक चीख-चीख कर पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर आरोप लगाए और बार-बार यही कहा कि मेरे शौहर को जिस बेरहमी से कत्ल किया गया और तीन गोलियां मारी गई, यह गांव वाले नहीं कर सकते। यह बड़ी साजिश है। सीओ की पैर में भी गोली लगने की बात कही गई है। यह खबर भी आई कि सीओ की हत्या उनके ही सर्विस रिवाल्वर से की गई है। यहां तक की प्रतापगढ़ के सीएमओ के हवाले से यह बात आई कि सीओ को सीने में गोली मारी गई है। पर मंगलवार को अरुण कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट की सीडी बनाकर रखी गई है और सच यही है कि सीओ को गोली पीठ में मारी गई जो सीने के पार निकल गई। सीओ को किस बोर की गोली लगी? इसके जवाब में उनका कहना था कि जब तक बुलेट नहीं मिलेगी, कहा नहीं जा सकता, क्योंकि पीछे से लगी गोली सीने को पार करती हुई निकल गई। अरुण की माने तो पूरा पुलिसिया अमला इस बुलेट की तलाश में जुटा है। पैर में उन्होंने गोली लगने से इन्कार किया है। यूं तो सुरेश यादव की हत्या में विजय पाल, संजय पाल, राजकुमार सरोज पर हत्या और संजय सिंह उर्फ गुड्डू पर हत्या के षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज है, लेकिन घटना में इस एंगल पर भी चर्चा हो रही है कि ग्राम प्रधान की हत्या के बाद सीओ उग्र भीड़ का शिकार हुए तो आकोश में पुलिस ने ग्राम प्रधान के भाई सुरेश यादव पर गोली चला दी। लेकिन इस सवाल को एडीजी अरुण खारिज करते हैं। एडीजी का कहना है कि मौके से सिर्फ 315 बोर के तीन खोखे मिले हैं। ग्राम प्रधान नन्हें यादव की हत्या 315 बोर के कारतूस से की गई है। सुरेश यादव के शरीर में 12 बोर के छर्रे पाए गए हैं और पुलिस 12 बोर और 315 बोर के असलहे लेकर नहीं चलती है। तो क्या पुलिस तमंचे और कंट्री मेड असलहों का प्रयोग नहीं कर सकती? अरुण कुमार का कहना है कि यह भी जांच का विषय है। उन्होंने ऐसे कई सवालों को खारिज करते हुए कहा कि बयान और कयास अपनी जगह है, लेकिन जांच में जो चीज सामने आएगी वही सच होगी और अभी हमारी जांच पूरी नहीं हो पायी है। आख्यान में कोई जांच लंबित नहीं सीओ की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उनके पति प्रतापगढ़ जिले के आख्यान गांव में पिछले साल हुई हिंसा की जांच कर रहे थे और इसमें उनके शौहर पर बहुत दबाव था। इस संदर्भ में अरुण कुमार ने कहा कि आख्यान में कोई जांच लंबित हो, ऐसा मेरे संज्ञान में नहीं है। भागने वालों की जांच एक महीने में होगी पूरी एडीजी अरुण कुमार ने पत्रकारों को बताया कि वलीपुर गांव में सीओ को मौके पर छोड़कर आठ पुलिस कर्मियों के भागने का आरोप है। इसकी जांच अपर पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ कर रहे हैं। उन्हें जांच पूरी करने को एक माह की अवधि दी गई है।