17 February 2019



प्रादेशिक
चार साल में चार हजार से ज्यादा लाड़लियां लापता
08-03-2013
बीते चार सालों के दौरान 4490 लड़कियों के लापता होने के मामले में कांग्रेस ने पहले तो गरमा गरम बहस की और बाद में गृहमंत्री के उत्तार से संतुष्ट न होने पर सदन से बहिर्गमन कर दिया। इससे पहले कांग्रेस के रामनिवास रावत ने कहा कि यह मानव तस्करी का मामला है और सरकार इस मामले पर गंभीर नहीं है।

प्रश्नकाल के दौरान रावत ने कहा कि प्रदेश में बीते चार सालों के दौरान करीब 29 हजार 828 लड़कियों के लापता होने के प्रकरण दर्ज हुए, जिसमें से 4490 आज भी लापता हैं। उन्होंने कहा कि यह मानव तस्करी का मामला है और इसे इसी रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक और राज्य सरकार बेटी बचाओ अभियान चलाकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी संख्या में लापता लड़कियों को बरामद करने के मामले में सरकार को कोई चिंता नहीं है। सरकार को इन लड़कियों के लंबे समय से लापता होने के कारण इनके मामले को मानव तस्करी के तहत दर्ज कर खोजबीन करना चाहिए। गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता के जवाब से अंतुष्ट होकर कांग्रेस सदस्यों ने एक साथ बोलना शुरू कर दिया। इससे सदन में लगभग सात मिनट तक हंगामे की स्थिति रही। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने कहा कि यह मामला गंभीर चिंता का विषय है और पुलिस प्रयास कर रही है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि सरकार और गृहमंत्री गंभीर नहीं हैं। इसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने बहिर्गमन कर दिया। गृहमंत्री ने सदस्यों के पूरक सवालों के जवाब में कहा कि वर्ष 2008 से जनवरी 2013 की अवधि तक प्रदेश में 29 हजार 828 नाबालिग लड़कियों के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। इनमें से 24 हजार 838 लड़कियों को ढूंढ लिया गया है। शेष 4990 लड़कियों की बरामदगी के लिए विशेष टीमों का गठन कर तलाश की जा रही है। इसके साथ ही विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।

गृहमंत्री ने कहा कि जो लड़कियां गुम हुई और बरामद नहीं हो सकी हैं, उनके मामलों को मानव तस्करी के तहत दर्ज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि मानव तस्करी में लड़की अथवा महिला की खरीदी व बिक्री होने पर ही इसके तहत प्रकरण दर्ज किया जाता है। गुम लड़कियों की बरामदगी के मामले में पुलिस गंभीरता पूर्वक प्रयास कर रही है। गुप्ता ने बताया कि मानव तस्करी के मामले रोकने के लिए शासन स्तर पर ग्वालियर और शिवपुरी जिले में मानव दुव्र्यापार विरोधी सेल का गठन किया गया है।