21 February 2019



प्रादेशिक
गरीब किसानों के नाम पर करोड़ों डकारे
11-03-2013
दिल्ली में गूंज रहे हजारों करोड़ों रुपये के किसान ऋण माफी घोटाले की गूंज पहले भी राजधानी सहित कई जिलों में हो चुकी है, लेकिन सफेद हाथी बने अपेक्स बैंक व जिला सहकारी बैंकों में आज तक किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई सरकार या बैंक प्रबंधक ने नहीं की है, जिससे बैंक कंगाल होते जा रहे हैं और अधिकारी मालामाल। एक दर्जन जिलों में हुए करोड़ों के घोटाले का मामला भी ईओडब्ल्यू की फाइलों में दम तोड़ रहा है। एक हजार करोड़ के ऋण माफी घोटालों में होशंगाबाद, हरदा, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, बैतूल, नरसिंहपुर, जबलपुर, पन्ना, टीकमगढ़, शाजापुर जिले शामिल हैं, जिसमें सहकारी बैंक व समितियां शामिल हैं, जिसकी जांच ईओडब्ल्यू कर रहा है। इसमें 38 जिलों में बैंक अध्यक्ष व महाप्रबंधक 85 करोड़ के घोटाले में शामिल पाए गए हैं। अकेले हरदा जिले में 75 करोड़ का घोटाला हुआ है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 2008 में किसानों की कर्ज माफी व राहत योजना के तहत करीब 1100 करोड़ रुपये की राशि मप्र को नाबार्ड से आवंटित की थी। इतना बड़ा मामला उजागर होने पर ईओडब्ल्यू ने 27 नवंबर 2011 को अपराध 38-11, धार 120 बी, 470 और 405 धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करें। 38 जिलों में पांच-पांच सौ करोड़ के घोटाले की जानकारी उजागर हुई। पिछले वर्ष 2011-12 में कर्ज माफी घोटाले का मामला उठा था, जिसमें सहकारिता मंत्री ने भी माना था कि 100 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी हुई है। ऐसे हुई गड़बड़ी नाबार्ड ने ऋण देते समय शर्त रखी थी कि ऋण माफी योजना लागू करने से पहले जिला सहकारी बैंक प्राथमिक सहकारी समितियों की आडिट कराया जाए। टीकमगढ़, भिंड, हरदा, होशंगाबाद जिले में कराई जांच में पता चला कि जिला बैंकों ने आडिट किए बगैर ही समिति प्रबंधकों की रिपोर्ट पर मोहर लगा दी। जिला बैंकों से छूट मिलने पर समिति प्रबंधकों ने मनमर्जी से कर्ज माफ कर लूट खसोट की।