16 February 2019



राष्ट्रीय
आंसुओं में बीत गए बीस साल, आज भी फरार है दहशत का दानव
12-03-2013
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को आज मंगलवार को बीस वर्ष पूरे हो गए हैं। इसके बाद भी आज तक लोगों के जहन में उस हादसे की याद ताजा हैं और जख्म गहरे हैं। लोगों के दिलो-दिमाग से आज भी उस ब्लैक फ्राइडे का काला धुंआ छटा नहीं है। आज भी लोगों को इंतजार है इन बम धमाकों को कराने वाले दाउद इब्राहिम होने वाली सजा का। बारह मार्च 1993 का ही वह काला दिन था जब मुंबई में एक के बाद एक बारह बम धमाकों में ढ़ाई सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और सात सौ अधिक लोग जख्मी हो गए थे। इन धमाकों से लगभग 27 करोड़ से अधिक राशि की संपत्ति नष्ट हो गई थी। यह पहला मौका था जब देश ने सीरियल बम ब्लास्ट के दंश को झेला था। इस मामले में विशेष अदालत में 686 गवाह पेश हुए और करीब दस हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई और 123 अभियुक्त बनाए गए। स्वतंत्र भारत में अब तक का यह सबसे पेचीदा मामला माना जाता है। आज तक भी इस मामले का मुख्य अभियुक्त दाऊद इब्राहिम पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। हालांकि इंटरपोल के दाउद के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी करने के बाद भी वह पुलिस की गिरफ्त से कहीं दूर है। हालांकि पूरी दुनिया इस बात से वाकिफ है कि दाउद आईएसआई की सरपरस्ती में कराची में ही सुकून की जिंदगी जी रहा है और उसको पाक सरकार का सरंक्षण भी मिला हुआ। बावजूद इसके पाक सरकार इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है। इसी मामले से जुड़े तीन अभियुक्त अबू सलेम, रियाज़ सिद्दीकी और मोहम्मद दौसा की सुनवाई को अलग कर दिया है क्योंकि इनकी गिरफ्तारी बहुत बाद में हुई थी। समाजवादी पार्टी के सांसद अबू आज़मी और अमजद मेहर बख्श को जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बरी कर दिया है वहीं एक अन्य अभियुक्त जमानत पर निकलने के बाद फरार हो गया। इसके अलावा मामले के 29 अभियुक्त अभी भी फरार बताए जाते हैं जिनमें इस पूरी घटना को कथित रुप से अंजाम देने वाले दाऊद इब्राहिम, अनीश इब्राहिम और टाइगर मेमन शामिल हैं जो कभी पकड़े नहीं गए। सीबीआई के अनुसार मुंबई धमाकों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से दाऊद इब्राहिम ने अंजाम दिया था। आरोपपत्र केअनुसार सिलसिलेवार धमाकों के अलावा 12 मार्च को मुंबई के हिंदू बहुल इलाकों में हथगोले भी फेंके थे। इसके बाद हुए दंगों में कई और जानें गईं थीं। दाऊद अमरीका द्वारा जारी आतंकियों की सूची में है और इंटरपोल को भी उसकी तलाश है। इस मामले में संजय दत्त का नाम भी शामिल था, लेकिन विशेष अदालत ने उन्हें इस मामलें में बरी कर दिया था। हालांकि वह गैरकानूनी रूप से एके 56 राइफल और एक पिस्तौल रखने के आरोप में अठारह माह जेल में बिता चुके हैं। विशेष अदालत ने उन्हें इस अपराध के लिए शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत उसे दोषी ठहराते हुए छह साल की सजा को सुनाई है। लेकिन उच्च न्यायालय में इस फैसले के खिलाफ उन्होंने अपनी याचिका दायर कर रखी है, जिसके बाद से ही वह जमानत पर बाहर हैं। सीबीआई की यह भी दलील थी कि संजय दत्त को अंडरव‌र्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के गुगरें ने एक एके 56 राइफल एक पिस्तौल और कुछ गोले उपलब्ध कराए थे। कुछ दिन बाद संजय दत्त ने गोले वापस कर दिये थे, लेकिन एके 56 राइफल रख ली थी।