17 February 2019



प्रादेशिक
टैप किए जा रहे हैं मंत्रियों-अफसरों के फोन
12-03-2013
प्रदेश में खूंखार अपराधियों के साथ ही कुछ मंत्रियों, नेताओं और अफसरों के फोन टैप हो रहे हैं जो अपने नाम के बजाय दूसरे के नाम से लिए गए सिम का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस मुख्यालय ने गृह विभाग से इजाजत लेकर फोन टैप तो करा लिए हैं, लेकिन गृह विभाग ने रिकॉर्ड की गई बातों का ब्यौरा मांगा तो पुलिस मुख्यालय ने गोपनीयता का हवाला देकर ब्यौरा उपलब्ध कराने से इन्कार कर दिया। गृह विभाग द्वारा यह ब्यौरा मांगने पर पुलिस मुख्यालय में हड़कंप है। पुलिस मुख्यालय सुरक्षा और अपराधियों की गतिविधि पर नजर रखने के नाम पर गृह विभाग से हर माह औसतन दो सौ फोन टैप करने की अनुमति लेता है। जिन फोन नंबरों को टैप करने की इजाजत मांगी जाती है, उनमें से ज्यादातर, जो नेतागण या अफसर उपयोग करते हैं, उनके नाम से नहीं होते। इसलिए गृह विभाग को पता ही नहीं होता कि वह असल में किसका फोन टैप करने की इजाजत दे रहा है। यह मामला तब सामने आया जब कृषि उत्पादन आयुक्त मदनमोहन उपाध्याय को गृह विभाग का अतिरिक्त प्रभार मिला। उपाध्याय ने पुलिस मुख्यालय से पूछा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में फोन टैपिंग की अनुमति लेकर उसने क्या सफलता हासिल की। उन्होंने इसका ब्यौरा भी मांगा। इससे पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मच गया। पुलिस मुख्यालय के अफसर गोपनीयता के नाम पर महकमे को ब्यौरा देने में आनाकानी कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जून, 2012 में राज्यों की संयुक्त बैठक में पुलिस मुख्यालय को दी जाने वाली फोन टैपिंग की अनुमति की समीक्षा हर दो माह में करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राज्य में जुलाई, 2012 के बाद से फोन टैपिंग मामलों पर समीक्षा बैठक हुई है।