16 February 2019



राष्ट्रीय
नो एफआइआर, नो अरेस्ट, फैसला ऑन द स्पॉट
15-03-2013
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लगातार सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम का विरोध कर रहे हैं। इस विवादित अधिनियम को हटाने के लिए पिछले बारह साल से इरोम शर्मिला चानू अनशन कर रहीं हैं। थल सेनाध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि अफस्पा हटाने की मांग गलत है। इसे नहीं हटाना चाहिए। इस अधिनियम को सेना के मनोबल से जोड़ते हुए अक्सर सेना इसे हटाने का विरोध करती है। एएफएसपीए के मुख्य प्रावधान शांति व्यवस्था के नाम पर सुरक्षा बलों को किसी व्यक्ति, झुंड पर गोली चलाने या अन्य ताकतों का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। इसके लिए पहले चेतावनी देना जरूरी होता है। सुरक्षा बलों को किसी ऐसे ट्रेनिंग कैंप या बंकर को ध्वस्त करने की स्वतंत्रता होती है, जहां हथियार जमा करके रखे जाते हैं या हिंसक गतिविधियों का संचालन किया जाता है। बिना किसी ठोस सबूत के केवल संदेह के आधार पर किसी को भी गिरफ्तार करने और किसी जगह की तलाशी लेने का अधिकार है। इसके लिए किसी वारंट की भी जरूरत नहीं होती। किसी क्षेत्र को अशांत घोषित करने के फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, न ही सुरक्षा बलों की गतिविधियों के खिलाफ कोई मुकदमा दायर किया जा सकता है।