24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
भारत से रिश्ते सुधारने को चीन ने सुझाए पांच उपाय
20-03-2013

बीजिंग। चीन ने भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए पांच सूत्री फॉर्मूले की घोषणा की है। देश के नए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का समाधान आसान नहीं है। दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किए बिना ही सीमा पर शांति बनाई रखी जानी चाहिए। 59 वर्षीय जिनपिंग चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और सेना के नए प्रमुख भी हैं। उन्होंने भारत के साथ संबंध सुधारने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। चीनी राष्ट्रपति ने अगले सप्ताह होने वाले ब्रिक्स [ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका] देशों के सम्मेलन से इतर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करने की इच्छा जताई है। जिनपिंग ने कहा कि विकासशील देशों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए भारत और चीन को बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करना चाहिए। दोनों देशों की कुल आबादी करीब 2.5 अरब है। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध को बहुत महत्वपूर्ण मानता है। जिनपिंग ने कहा, \'सीमा का सवाल पहले से चला आ रहा जटिल मुद्दा है और इसका समाधान आसान नहीं है। अगर दोनों देश मित्रवत रूप से विचार विमर्श जारी रखते हैं तो हम उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समझौते तक पहुंच सकते हैं।\' नए राष्ट्रपति चीन के नए नेतृत्व द्वारा भारत के प्रति अपनाई जाने वाली नीति को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। जिनपिंग से यह भी पूछा गया था कि क्या भारत के साथ सीमा विवाद के मुद्दे पर चीन के रुख में कोई बदलाव आएगा। भारत जोर देकर कहता है कि चीन के साथ 4000 किलोमीटर की सीमा पर विवाद है। जबकि चीन का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्र में 2000 किलोमीटर की सीमा को लेकर विवाद है। वह इस क्षेत्र को दक्षिणी तिब्बत बताता है। यह हैं पांच उपाय भारत और चीन को कूटनीतिक बातचीत जारी रखनी चाहिए। उन्हें द्विपक्षीय संबंधों को सही रास्ते पर रखना चाहिए। दोनों देशों को एक दूसरे की तुलनात्मक क्षमता का प्रयोग करते हुए आधारभूत संरचना, आपसी निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहिए। भारत और चीन को सांस्कृतिक संबंध मजबूत करना चाहिए। दोनों देशों को अपनी दोस्ती का विस्तार करना चाहिए। बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय और सहयोग बढ़ाना चाहिए ताकि विकासशील देशों के हितों की रक्षा की जा सके। एक दूसरे की मुख्य चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए। दोनों देशों के बीच मौजूद समस्याओं और मतभेदों को उचित रूप से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। चिनफिंग के नए पंचशील को तौल रहा भारत नई दिल्ली। चीन के नए राष्ट्रपति शी चिनफिंग के पांच सूत्रीय फार्मूले को भारत अभी तौलने में लगा है। आपसी हितों का टकराव टालने और तालमेल बढ़ाने के साथ चिनफिंग के नए पंचशील ने नई सोच पेश की है। हालांकि, नई दिल्ली की नजर जमीन पर इसके मुताबिक चीनी नजरिए में बदलावों को आंकने पर होगी। सत्ता संभालने के बाद दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन से मुलाकात से पहले नए चीनी राष्ट्रपति की ओर से रिश्तों को लेकर आए व्यापक नजरिये को भारतीय खेमा स्वागत योग्य करार दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि चिनफिंग के बयान अहम तो हैं, लेकिन इनसे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। चीनी राष्ट्रपति ने उच्चस्तरीय संपर्क से लेकर तालमेल तक रिश्तों के सभी आयामों को समेटते हुए एक रोडमैप पेश किया है। हालांकि यह बेहद जरूरी है कि चीन अपनी नीतियों में भी इसे उतारे। महत्वपूर्ण है कि चीनी नेतृत्व के नए नजरिए को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी और भारत की उभरती ताकत के मद्देनजर संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। भारतीय खेमे में इन नए सूत्रों को भविष्य में चीन के साथ वार्ता के नए सिद्धांतों के तौर पर भी देखा जा रहा है। चीनी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि दोनों मुल्कों के बीच उच्चस्तरीय रणनीतिक संपर्क का सिलसिला जारी रहे। साथ ही बाजार में सहयोग और तालमेल पर जोर दिया है। हालांकि नेहरू के पंचशील सिद्धांतों पर रजामंदी दिखाने और हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारों के विपरीत 1962 के युद्ध के अनुभव भारतीय खेमे को अधिक सतर्क बनाते हैं। सूत्रों का कहना है कि भारत के लिए सतर्कता और अपनी ताकत मजबूत करते रहना ही एकमात्र नीति है।