21 February 2019



प्रादेशिक
सांस्कृतिक मेले में गूंजी थाप और कुर्राटी
21-03-2013
पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल में सात दिवसीय सांस्कृतिक लोकपर्व भगोरिया का बुधवार को पारंपरिक अंदाज में आगाज हुआ। झाबुआ जिले के कल्याणपुरा, ढेकल, रोटला व माछलिया में मांदल की थाप युवक-युवतियों ने नृत्य किया। कल्याणपुरा में दोनों राजनीतिक दलों ने गेर निकाली। उधर आलीराजपुर जिले के चांदपुर, खट्टाली और बोरी में भी भारी चहल-पहल के बीच परंपरागत उल्लास के साथ पर्व की शुरआत हुई। इस बार महंगाई का असर भी देखने को मिला। अति संवेदनशील क्षेत्र माने जाने वाले चांदपुर कस्बे में पुलिस प्रशासन के आला अफसर पूरे समय तक तैनात रहे। यहां के भगोरिए में गुजरात के फेरकुआं, रंगपुर, देवहाट, नानी सढ़ली व साजनपुर तक के ग्रामीण दिखे। मेलों में सुबह 11 बजे से भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। दोपहर 2 बजे तक पर्व पूरे शबाब पर आ गया और 1 से 3 बजे तक मस्ती परवान चढ़ चुकी थी। हालांकि मेला स्थल पर शाम तक भीड़ नजर आई। सुबह जल्दी आकर झूला-चक्करी वालों ने अपनी दुकान सजा ली थी। हाट में सभी प्रकार की सैकड़ों दुकानें लगी थीं। मेला स्थल पर मदमस्त होकर युवाओं की टोलियां बांसुरी की तान छेड़ते हुए घूम रही थीं। बांसुरी की तान सुनकर साथ चल रहे अनेक ग्रामीण भी स्वयं को थिरकने से रोक नहीं पा रहे थे। बच्चों ने शरबत, बर्फ के गोले, नमकीन भजिए, चने आदि की खरीदी की। धार जिले के डही से करीब 10 किमी दूर ठेठ आदिवासी गांव अरा़़डा में दोपहर बाद भगोरिया हाट परवान चढ़ा। चटक रंगों वाले वस्त्रों में सजे-संवरे आदिवासी बडे़-बडे़ ढोल, मांदल और बांसुरी की धुनों पर नाचते-थिरकते रहे। मेले में खानपान, नाच-गाना और खरीद-फरोख्त का सिलसिला दिनभर चलता रहा। गुरवार को डही में भगोरिया हाट लगेगा। दूसरी तरफ अराड़ा में चकरी-झूले नहीं आने से लोगों में निराशा हुई। बड़वानी जिले में सिलावद और भवती में लगे भगोरिया हाट में आदिवासी लोग सज-संवर कर पहुंचे। ढोल-मांदल पर युवा-बच्चे जमकर झूमे और नृत्य किया।