18 February 2019



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नर्मदा-क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना रेकार्ड अवधि में पूरा करने का संकल्प
21-03-2013

भारत में नदी जोड़ परिकल्पना को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश में की जा रही नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना की अनूठी पहल को अब नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण अगस्त माह के अंत तक पूरा कर लेना चाहता है। इसके लिये प्राधिकरण ने सभी स्तरों पर युद्ध स्तरीय प्रयास आरम्भ कर दिये हैं।

ज्ञात हो कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा गत 08 अगस्त 2012 को नर्मदा-क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना को स्वीकृति देने के साथ ही इस परियोजना को एक वर्ष की अवधि में पूरा करने का संकल्प व्यक्त किया था। प्राधिकरण द्वारा तीन माह की अवधि में परियोजना के सर्वेक्षण से लेकर कार्य निर्माण एजेन्सी निर्धारण तक की सभी कार्यवाहियाँ पूर्ण कर नवम्बर 2012 से मैदानी स्तर पर कार्य आरम्भ किया जा चुका है। इस परियोजना के जरिये नर्मदा का 5 क्यूमेक जल उद्वहन कर ग्राम उज्जैनी के निकट क्षिप्रा उद्गम-स्थल पर प्रवाहित किया जायेगा। संगम-स्थल को धार्मिक पर्यटन-स्थल का स्वरूप दिया जायेगा।

प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री के.एल.अग्रवाल निर्धारित एक वर्ष की कार्य पूर्णता की अवधि से पहले अगस्त 2013 में ही नर्मदा-क्षिप्रा का संगम करवाने के लिये परियोजना कार्यों की व्यक्तिगत स्तर पर सतत् मानिटरिंग कर रहे हैं। बुधवार 21 मार्च को श्री अग्रवाल ने नर्मदा जल उद्वहन -स्थल सिसलिया जलाशय में चल रहे कार्यों के साथ ही निर्माणाधीन पम्प हाउसों और पाईप लाईन डाले जाने के कार्य का सघन निरीक्षण किया। श्री अग्रवाल ने निर्माण स्थल पर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और निर्माण एजेन्सी के इंजीनियरों के साथ परियोजना के तकनीकी पक्षों की समीक्षा कर प्रतिदिन आधारित कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया और उन्हें प्रतिदिन की कार्य प्रगति से अवगत करवाने के निर्देश दिये। श्री अग्रवाल ने कहा कि रेकार्ड समयावधि में परियोजना को पूरा करने में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिये। श्री अग्रवाल ने परियोजना में लगाये जा रहे विशाल पाइपों की गुणवत्ता का स्वयं तकनीकी परीक्षण किया। अपनी कार्ययोजना अनुसार श्री अग्रवाल अब प्रत्येक पखवाड़े परियोजना कार्यों का स्थल अवलोकन करेंगे।

परियोजना के विभिन्न दूर-दराज अंचलों में चल रहे कार्यों के निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने दो पवित्र नदियों के संगम के इस कार्य के लिये सरकार और प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रति अपनी कृतज्ञता, प्रसन्नता और आभार प्रकट किया। जल उद्वहन जलाशय सिसलिया तालाब में कई पीढ़ियों से अस्थाई पट्टे पर खरबूजे की खेती करने वाले परिवारों ने श्री अग्रवाल से इस आधार पर राज सहायता की अपेक्षा की कि अब जलाशय में बारहमासी जल भराव होने से उन्हें खरबूजे की खेती के लिये स्थान नहीं मिल सकेगा और उनकी आजीविका प्रभावित होगी। श्री अग्रवाल ने इन परिवारों की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की बात कही। प्राधिकरण के सदस्य अभियांत्रिकी श्री जे.आर. इंगले भी निरीक्षण और तकनीकी समीक्षाओं में उपस्थित थे।