24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
चार साल बाद पाकिस्तान लौटे मुशर्रफ
25-03-2013
तालिबान की धमकी को दरकिनार करते हुए पाकिस्तानी के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ अपना चार साल का स्व निर्वासन खत्म कर रविवार को पाकिस्तान लौट आए हैं। उन्होंने कहा है कि वह सुरक्षा, राजनीतिक और कानूनी से जुड़ी हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। मुशर्रफ आगामी 11 मई को होने वाले आम चुनावों में अपनी पार्टी आल पाकिस्तान मुस्लिम लीग का नेतृत्व करेंगे। 69 वर्षीय मुशर्रफ दुबई से चार्टर्ड अमीरात की फ्लाइट से रविवार दोपहर कराची स्थित जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचे। उनके साथ 150 लोग हवाई अड्डे से बाहर निकले, जिनमें उनकी पार्टी के समर्थक, प्रतिनिधि मंडल के सदस्य और कुछ पत्रकार शामिल थे। बातचीत के दौरान मुशर्रफ ने मुस्कुराते हुए कहा,\'यह बहुत ही भावनात्मक पल है। मैं चार साल बाद अपने देश लौट रहा हूं। पाकिस्तान में काफी बदलाव हो चुके हैं। सुरक्षा, कानून और राजनीति से जुड़ी कई चुनौतियां हैं, जिनका सामना करने के लिए मैं तैयार हूं।\' सिंध हाई कोर्ट ने हाल में मुशर्रफ को बेनजीर हत्याकांड समेत कई मामलों में अग्रिम जमानत दे दी थी। इनमें वे मामले भी शामिल हैं जिनमें उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया है। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय के जरिए गृह मंत्री को पूर्व सेना अध्यक्ष की सुरक्षा के सख्त बंदोबस्त करने के लिए पत्र भेजा था। हवाई अड्डे पर मुशर्रफ की पूर्व नियोजित प्रेस कांफ्रेंस को सुरक्षा कारणों से रद किया गया। मुशर्रफ इस सप्ताह के आखिर में पत्रकारों से बातचीत करेंगे। पार्टी के एक सदस्य ने बताया, \'सुरक्षा कर्मियों ने मुशर्रफ को उनके गंतव्य तक पहुंचने से पहले किसी प्रेस कांफ्रेंस या रैली को संबोधित नहीं करने की सलाह दी थी। सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया।\' इस्लामाबाद रवाना होने से पहले मुशर्रफ दो दिन कराची में ही रहेंगे।

उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान में तहरीके-तालिबान पाकिस्तान [टीटीपी] ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि पाकिस्तान लौटने पर उसके लड़ाकों का मुख्य निशाना मुशर्रफ होंगे। बेहतर हो कि वह आत्म समर्पण कर दें।

मुशर्रफ की वतन वापसी के मायने

स्वनिर्वासन को खत्म करते हुए पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ साढ़े चार साल बाद वतन पहुंच चुके हैं। उनका इरादा 11 मई से होने वाले वहां के आम चुनाव में हिस्सा लेना है। पाकिस्तान में हत्या के दो मामलों में उनके खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट जारी किए जा चुके हैं। हालांकि हाल ही में उन्हें इन मामलों में अग्रिम जमानत मिल चुकी है लेकिन चुनावी राजनीति में खास कामयाबी न मिलने की अटकलों को बीच हर कोई जान और समझ रहा है कि मुशर्रफ जिस रास्ते पर लौट रहे हैं उसमें फूल कम कांटे ज्यादा हैं। ऐसे में उनके वतन वापसी पर हर कोई सवाल खड़ा कर रहा है। उनके इस कदम के मायनों पर पेश है एक नजर:-

खतरनाक रास्ता:

- पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुंट्टो और बलूच नेता अकबर खान बुगती की हत्या के मामलों में गिरफ्तारी के वारंट, अग्रिम जमानत भले ही मिल चुकी हो लेकिन बाद में स्थितियां दुश्वर हो सकती हैं।

-इस्लामाबाद की लाल मस्जिद पर 2007 में हुई कार्रवाई के सिलसिले में भी उनकी अदालत में पेशी होनी है

-2007 में मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी को बर्खास्त करने के मामले में उन्हें राजद्रोह का सामना करना पड़ सकता है

- आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी मुहिम में साथ देने के चलते तालिबान के निशाने पर

- मानवाधिकार उल्लंघन के भी मामले

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उम्मीद की रोशनी

- विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान चुनाव में शिरकत करके मुशर्रफ का न्यूनतम लक्ष्य गिरफ्तारी से बचना और संसद की एक सीट जीतना हो सकता है

- पाकिस्तानी व्यवस्था में दबदबा रखने वाली सेना अपने पूर्व प्रमुख को अदालत के चक्कर शायद न काटने दे

- मुशर्रफ को कराची जैसे शहरी क्षेत्र के उन युवा उद्यमियों और पेशेवर लोगों के बीच समर्थन प्राप्त है, जिन्हें उनके कार्यकाल में फायदा हुआ था। जनवरी, 2012 में जब उन्होंने दुबई से वीडियो लिंक के जरिए कराची में एक रैली की तो उन्हें सुनने के लिए बहुत से लोग उमड़ पड़े थे

- विश्लेषकों का मानना है कि एमक्यूएम जैसे राजनीतिक दलों की साझीदारी के बूते संसद की एक सीट जीतना मुश्किल नहीं है

- वापसी से कम से कम इतिहास में उनका नाम बतौर भगोड़ा दर्ज होने से बच जाएगा

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अर्श से फर्श पर

- तत्कालीन सेना प्रमुख रहे मुशर्रफ ने नवाज शरीफ सरकार का 13 अक्टूबर, 1999 को तख्तापलट कर दिया

- 20 जून, 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति रफीक तरार को हटाकर खुद पद पर आसीन हुए विराजमान हुए

- आम चुनावों से ठीक पहले मार्च, 2007 में मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी को बर्खास्त करना भारी पड़ा। मुशर्रफ के खिलाफ पूरे देश में वकीलों का उग्र आंदोलन शुरू हुआ

- 10 जुलाई, 2007 को इस्लामाबाद की लाल मस्जिद पर सैन्य कार्रवाई का हुक्म दिया। सौ से ज्यादा लोग मारे गए। इस घटना से छवि को गहरा धक्का लगा

- अक्टूबर, 2007 में विवादों के बीच राष्ट्रपति चुनाव जीते

- घटती लोकप्रियता के बीच नवंबर, 2007 में आपातकाल लगाया। इसी महीने सेना प्रमुख पद को छोड़ा। अशफाक कयानी नए सेनाध्यक्ष बने

- दिसंबर, 2007 में एक राजनीतिक रैली के दौरान ताकतवर नेता बेनजीर भुंट्टो की हत्या कर दी गई। विरोधियों ने इनका हाथ होने का आरोप लगाया

- फरवरी, 2008 में आम चुनाव हुए। मुशर्रफ की पार्टी को लोगों ने खारिज कर दिया। नवाज शरीफ [पीएमएल एन] और आसिफ अली जरदारी [पीपीपी] ने मिलकर सरकार बनाई

- अगस्त, 2008 में गठबंधन सरकार ने मुशर्रफ पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही

- भारी दबाव में मुशर्रफ अगस्त, 2008 में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर खुद से देश छोड़कर चले गए।

- मई, 2010 में देश से बाहर रहते हुए पाकिस्तानी राजनीति में प्रवेश करने की इच्छा जाहिर की

-अक्टूबर, 2010 में ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग नाम से राजनीतिक दल की शुरुआत की। खुद इसके अध्यक्ष बने