22 February 2019



राष्ट्रीय
इस धंधे ने दीपक भारद्वाज को स्टेनोग्राफर से अरबपति बनाया
26-03-2013
हरियाणा के सोनीपत में बेहद साधारण परिवार में जन्मे दीपक भारद्वाज ने बहुत कम समय में तरक्की की सीढि़यां चढ़ी। वर्ष 1950 में जन्मे दीपक भारद्वाज दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम करने के बाद सेल्स टैक्स विभाग में सात साल तक स्टेनोग्राफर भी रहे। मगर नौकरी उन्हें रास नहीं आई। उन्होंने आटोमोबाइल पार्टस बनाने का काम शुरू किया। इसके साथ साथ प्रोपर्टी का धंधा भी पार्ट टाइम करने लगे। प्रोपर्टी के काम में जबरदस्त मुनाफा होते देख उन्होंने वर्ष 1979 में आटोमोबाइल पार्टस बनाने का काम बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी दिल्ली में कई किसानों से उनकी कृषि योग्य जमीन खरीदकर फार्म हाउस बनाए। एक बार प्रोपर्टी के धंधे के उतरने के बाद फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जमीनों की खरीद फरोख्त में करोड़ों के वारे न्यारे होने लगे। उन्होंने स्कूल, होटल और टाउनशिप में कदम रखा। हरिद्वार के समीप दीपक भारद्वाज ने टाउनशिप की नींव भी रखी। द्वारका इलाके में उनका शिक्षा भारती के नाम से स्कूल है। इसके अलावा गुडगांव रोड पर कई होटल एवं आलीशान फार्म हाउस के मालिक दीपक भारद्वाज ने राजनीति में भी कदम रखा। बताया जाता है कि दीपक भारद्वाज को उस समय ज्यादा फायदा हुआ जब उनकी कुछ जमीन दिल्ली एयरपोर्ट के लिए अधिगृहित की गई। बीएसपी के टिकट पर 2009 में उन्होने पश्चिमी दिल्ली से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। उन्होंने चुनाव आयोग में खुद को 600 करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक बताया था। जिसे लेकर मीडिया में उन्होंने काफी सुर्खियां बटोरी। हालांकि वह कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी महाबल मिश्रा से चुनाव हार गए थे।