16 February 2019



राष्ट्रीय
दिल्ली: अरबपति बिल्डर के हत्यारे अब भी पुलिस की पकड़ से दूर
30-03-2013
वारदात के अगले ही दिन स्कोडा कार की बरामदगी, फायरिंग करने वाले भाड़े के हत्यारे की पहचान, मगर हत्या का मकसद चार दिन बाद भी स्पष्ट नहीं! यह हाल है 26 मार्च को दक्षिण दिल्ली में हुए अरबपति बिल्डर व कारोबारी दीपक भारद्वाज हत्याकांड की जांच का। माना जा रहा है कि इस केस को स्पेशल सेल या क्राइम ब्रांच को सौंपा जा सकता है।

वारदात में इस्तेमाल स्कोडा लॉरा कार मिलने के बाद माना जा रहा था कि इस हत्याकांड से पुलिस जल्द पर्दा उठा देगी। भारद्वाज की पत्नी रमेश कुमारी एवं पुत्र नितेश और हितेश से कई बार पूछताछ भी हो चुकी है।

एक आला अधिकारी का कहना है कि कड़ियां जोड़ने के लिए सुनील उर्फ सोनू तथा पुरुषोत्तम उर्फ मोनू का गिरफ्त में आना बेहद जरूरी है। बाहरी दिल्ली के रहने वाले इन दोनों युवकों का नाम भारद्वाज पर गोली चलाने वाले शूटर के रूप में सामने आया है। भारद्वाज की हत्या के बाद भागते समय सीसीटीवी में पिस्टल लहरा रहा युवक पुरुषोत्तम ही है।

ज्ञात हो कि बृहस्पतिवार को पुलिस द्वारा शूटर समेत आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लेने की बात मीडिया में कही जा रही थी। शुक्रवार को अधिकारियों ने इस बात का खंडन कर दिया कि भारद्वाज के शूटर कब्जे में आ गए हैं। दक्षिण जिला पुलिस का कहना है कि मुख्य हत्या का मुख्य साजिशकर्ता कौन है, यह जानने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि इस बात के संकेत अवश्य दिए कि बेहद करीबी व्यक्ति इस वारदात में शामिल है। इस बीच, दक्षिण जिला पुलिस द्वारा अभी तक मामले का खुलासा न करने पर इस केस को स्पेशल सेल या क्राइम ब्रांच को सौंपने की अटकलें भी तेज हो गई हैं।

इस मामले में जींद से हिरासत में लिए गए वीरेंद्र, अनिल तथा धर्मवीर नाम के तीनों युवकों को पूछताछ के बाद बृहस्पतिवार देर रात रिहा किए जाने की भी सूचना है। पुलिस सूत्रों के अनुसार नामों में समानता के चलते गलतफहमी हुई। पुलिस के एक आला अधिकारी का कहना है कि स्कोडा कार मालिक राकेश से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि उससे सेकेंड हैंड कार खरीदने का सौदा सुनील उर्फ सोनू ने किया था।

आठ लाख रुपये में कार खरीदने की बात तय हुई थी जिसकी पेशगी रकम राकेश को अदा भी कर दी गई था। इस बीच कार को ट्रायल के बहाने मांग कर ले जाया गया था। हालांकि अधिकारी अभी राकेश को क्लीनचिट देने के मूड में नहीं है। उससे पूछताछ की जा रही है।

पुरुषोत्तम की आपराधिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर पुलिस उसके संपर्को की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता चला है कि वारदात के बाद सुनील ने कार वापस छोड़ दी थी। फरार होने के लिए हत्यारों ने सेंट्रो कार का इस्तेमाल किया था। दक्षिण जिला पुलिस के एक आला अधिकारी का कहना है कि इस हत्याकांड का राज खुलने के बेहद करीब है। मामले में केवल भाड़े के हत्यारों की गिरफ्तारी बाकी है। उनसे पूछताछ के बाद इस पूरे घटनाक्रम के साजिशकर्ता का नाम सामने आ पाएगा।

पुलिस दीपक भारद्वाज हत्याकांड में अब तक 100 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इतना ही नहीं परिजनों से भी पूछताछ कर रही है। अभी तक की पूछताछ में परिवार के बीच कुछ आपस में मनमुटाव की बात भी सामने आई है। हालांकि अभी तक पुलिस अधिकारियों व परिजनों ने इस विषय में खुलकर कुछ नहीं बोला है।

सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को भी पुलिस टीमों ने हरियाणा के कुछ इलाकों में दबिश दी। पुरुषोत्तम और सुनील की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दस टीमें दिन रात एक किए हुए हैं। हरियाणा के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान से सटे इलाकों में भी हत्यारों की तलाश जारी है।

ज्ञात हो कि 26 मार्च को सुबह दीपक भारद्वाज की रजोकरी में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 स्थित उनके फार्महाउस में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावर अलीपुर क्षेत्र से स्कोडा लॉरा कार में सवार होकर सुबह 8:55 पर फार्महाउस पहुंचे थे और वारदात को अंजाम देकर सुबह 9.15 पर निकल गए। जांच में पता चला है कि दीपक भारद्वाज के दो पीएसओ सुबह दस बजे ड्यूटी पर आते थे। दीपक के पास हथियार का लाइसेंस भी था। लेकिन घटना के समय उनके पास कोई हथियार नहीं था।

दीपक भारद्वाज के स्टाफ के अलावा वारदात के दौरान नितेश कुंज स्थित उनके फार्महाउस पर मौजूद गार्डो से शुक्रवार को भी पूछताछ हुई। गाडरें ने पूछताछ में बताया कि उन्हें एक हमलावर ने अपना नाम सुमंत बताया था। एक व्यक्ति और साथ होने के कारण उसने रजिस्टर में सुमंत के नाम से अपना नाम दर्ज किया था। घटनाक्रम के अलावा स्टाफ से फार्महाउस में दीपक भारद्वाज से मिलने के लिए आने वाले लोगों के विषय में भी छानबीन की जा रही है।