17 February 2019



प्रादेशिक
राजनाथ जो कहेंगे वो करूंगी: उमा भारती
01-04-2013
लंबे समय बाद भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनकर राष्ट्रीय राजनीति में लौटीं उमा भारती ने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उनकी भूमिका पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह तय करेंगे। वे जो कहेंगे वैसा करूंगी, लेकिन गंगा अभियान में पूरी आजादी लूंगी। मैं जो कहूंगी, उसमें राजनाथ सहयोग करेंगे। मुझे ऐसी कोई गलती नहीं करनी है जिससे साख पर बट्टा लगे। सुश्री भारती को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने की सूचना करीब सवा 11 बजे पार्टी अध्यक्ष ने फोन करके दी। इसके बाद सिविल लाइन स्थित सरकारी आवास पर मिलने वालों का तांता लग गया। इस दौरान ही उन्होंने कहा कि जो विश्वास पार्टी नेताओं ने जताया है, उसे कायम रखूंगी। संसदीय बोर्ड में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष सबसे सलाह करके चलने वाले हैं। उन्होंने जो तय किया, वह बेस्ट किया है। अब नई पौध को आगे आना होगा। अटल-आडवाणी से किसी की तुलना नहीं हो सकती है। आगे की रणनीति का खुलासा करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि विकास और हिंदुत्व को मिलाकर आगे बढ़ा जाएगा। विकास का मतलब सुशासन है। जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां विकास पर काम हो रहा है। प्रदेश में ब़़ढते गैंगरेप सहित अन्य समस्याओं पर उन्होंने कहा कि मैं चिंतित जरूर हूं, लेकिन कुछ कहूंगी नहीं। सुश्री भारती ने एक सवाल के जवाब में बताया कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने आडवाणी की प्रशंसा करके बड़प्पन का परिचय दिया है, लेकिन इससे उनके पाप कम होने वाले नहीं हैं। उप्र बलात्कारी और अपराधियों की गिरफ्त में है। सपा की कलई खुल गई है। अभिनेता संजय दत्त की सजा माफी पर चल रही चर्चा के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अफजल गुरु और संजय दत्त का अपराध समान है। वह दोशद्रोही है और उसने जघन्य अपराध किया है। इसलिए जो सजा मिली है, वह काफी कम है। जो भी लोग संजय की सजा को माफ या कम करवाने की मुहिम चला रहे हैं, वे तुच्छ राजनीति कर रहे हैं। देश ऐसी किसी भी कवायद को स्वीकार नहीं करेगा। सुश्री भारती को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के एलान के बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने उन्हें फोन करके बधाई दी। इस पर उन्होंने भी चौहान को बधाई देते हुए कहा कि आप प्रदेश को नंबर वन पर ले आए हैं रोमांचकारी रही अभी तक की यात्रा उमा भारती ने कहा कि अभी तक यात्रा से स्वयं चकित हूं। मुझे हमेशा वे मौके मिलते हैं, जो इतिहास में दर्ज हो जाते हैं। चाहे वह हुबली हो या फिर अयोध्या। छह से लेकर 20 वषर्ष तक की उम्र में 80 देशों में धर्मप्रचार का काम किया। 27 साल में सांसद बन गई और 37 में केंद्रीय मंत्री। 42 की आयु में मुख्यमंत्री का पद मिला। दो बार पार्टी की महासचिव रही। अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हूं। यह सब इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि न तो मेरा कोई गॉडफादर था, न ही कोई पारिवारिक पृष्ठभूमि। जाति और माली हालत भी ऐसी नहीं थी जो मददगार साबित होती।