17 February 2019



प्रादेशिक
किसानों से जबरिया नहीं होगी वसूली
08-04-2013
ओला की मार से प्रभावित किसानों की वसूली स्थगित करने के साथ चुनावी साल में आम किसान से भी कर्ज वसूली में सख्ती नहीं होगी। गेहूं बेचने पर मिलने वाली रकम से यदि किसान सहमति से कर्ज अदा करना चाहेंगे तो ही कटौती की जाएगी। इसके लिए अपेक्स बैंक ने सभी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों को बकायदा फरमान जारी कर दिया है। हालांकि, इस कदम से बैंक की वसूली प्रभावित होने के आसार बढ़ गए हैं। प्रदेश की साढे़ चार हजार से ज्यादा सहकारी समितियों ने किसानों को रबी फसलों के लिए साढे़ तीन हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज बांटा है। इसकी वसूली 15 जून तक की जानी है। इसलिए समितियां किसानों पर गेहूं बेचने पर मिलने वाली रकम से कर्ज अदा करने के लिए दवाब बनाती हैं। दरअसल, किसानों को गेहूं का भुगतान उनके सहकारी बैंकों के खातों में किया जाता है। इसके कारण समिति पदाधिकारियों को पता रहता है कि किसानों के खाते में कितनी रकम है। इस आधार पर ही कर्ज वसूली के लिए किसानों पर दवाब बनाया जाता है कि वे भुगतान में से कुछ हिस्सा दे दें। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं होगा। किसी किसान पर उपज के ऐवज में मिली रकम से कर्ज चुकाने का दवाब नहीं बनाया जाएगा। वैसे भी ओला-पाला प्रभावित किसानों से कर्ज वसूली स्थगित कर दी गई है। इससे बाकी किसानों में रोषष न फैले, इसलिए जबरिया वसूली पर रोक लगा दी गई है। अब यदि किसान सहमति देगा तो ही गेहूं के भुगतान में से वसूली की जाएगी। हालांकि, इससे बैंकों की वसूली प्रभावित होने के आसार बढ़ गए हैं। सूत्रों का कहना है कि हर गेहूं उपाजर्न केन्द्र पर किसानों से की जाने वाली वसूली का पूरा रिकार्ड मौजूद है। ई-उपार्जन सॉफ्टवेयर में किसान की पूरी कुंडली बनाकर रखी गई है। इसका मकसद वसूली को बढ़ावा देना ही था। लेकिन, मौसम की मार और चुनाव के साल को देखते हुए रणनीति में बदलाव किया गया है। हालांकि, इससे बैंकों का हिसाब-किताब गड़बड़ा जाएगा। बैंक के सूत्रों का कहना है कि ओला-पाला प्रभावित किसानों का सर्वे अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके कारण न तो कर्ज को अल्पावधि से मध्यावधि में तब्दील किया जा सका है और न ही नाबार्ड को कोई जानकारी भेजी गई है। बताया जा रहा है कि अभी तक 27-28 जिलों की रिपोर्ट