24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
आतंकवाद से लड़ने में सहयोग बढ़ाएंगे भारत-ताजकिस्तान
16-04-2013
भारत और ताजकिस्तान ने अपनी सुरक्षा और सीमापार से आतंकवाद के मुद्दे व साझा सहयोग को अधिक मजबूत करने पर सहमति जताई है। दोनों मुल्कों ने ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा के अलावा ताजकिस्तान में छोटे व लघु उद्योगों की स्थापना पर भी रजामंदी जताई है। भारत के उप राष्ट्रपति मुहम्मद हामिद अंसारी और ताजकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमोली रहमान के बीच सोमवार को यहां कैसर-ए-मिल्लत [पैलेस ऑफ नेशन] में हुई बातचीत में विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच और सहयोग बढ़ाने पर रजामंदी बनी। बाद में दोनों ने साझा बयान भी जारी किया। अंसारी ने कहा, वैसे तो भारत और ताजकिस्तान के रिश्ते पहले से मजबूत हैं, लेकिन समय आ गया है कि उसे और बुलंदी पर ले जाया जाए। अंसारी ने कहा, हमने आपसी सुरक्षा और सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर सहयोग बढ़ाने की बात की। साथ ही मध्य एशिया क्षेत्र की सुरक्षा पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इस लिहाज से अफगानिस्तान की स्थिति दोनों के लिए खास मायने रखती है। दोनों ही देश अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से अफगानिस्तान में शांति, स्थायित्व व खुशहाली लाना चाहते हैं। हैं। उप राष्ट्रपति ने बताया कि ऊर्जा, आइटी, स्वास्थ्य, शिक्षा और छोटे व लघु उद्योगों की ताजकिस्तान में स्थापना के लिए भी दोनों देशों में आपसी सहयोग की सहमति बनी है। ताजकिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के उप राष्ट्रपति के साथ बहुत अच्छे माहौल में व्यापार, निवेश, गैर सैन्य व क्षेत्रीय सहयोग के विभिन्न मुद्दों पर बात हुई है। ताजकिस्तान भारत से ऊर्जा, परिवहन, उद्योग व शिक्षा जैसे मामलों में मदद का पक्षधर है। सुरक्षा और सीमापार आतंकवाद की समस्या दोनों के लिए एक जैसी है। उससे निपटने में हमारा साझा प्रयास जारी रहेगा। ताजकिस्तान के दिल में बसता है भारत दुशांबे [राजकेश्वर सिंह]। भारत में जितना बड़ा उत्तर प्रदेश है, आबादी के लिहाज से उतने में लगभग तीन ताजकिस्तान बस सकते हैं। यह देश छोटा जरूर है, लेकिन उसके दिल में भारत भी बसता है और उसके लिए तड़पता भी है। ताजिक लोग हिंदी फिल्में देखते हैं और शाहरुख खान के दीवाने भी हैं। ताजिक और रूसी भाषा के बोलबाले के बीच हिंदी को चाहने वालों की भी कमी नहीं है। बतौर उप राष्ट्रपति पहली बार ताजकिस्तान आए मुहम्मद हामिद अंसारी को भारत के लिए मौजूद जज्बे का अहसास उस वक्त हुआ जब वे यहां अपने सम्मान में भारतीय दूतावास की तरफ से दिए गए रात्रिभोज में पहुंचे। रात्रिभोज में उप राष्ट्रपति से रू-ब-रू हुईं नाजिया ताजकिस्तान में ही पैदा हुई और पली बढ़ीं, लेकिन संगीत भारत में सीखा। उनके संगीत-गायन के गुरू दिल्ली के हैं। नाजिया कहती हैं, \'पांच साल दिल्ली में रही हूं। अब लौट आई हूं। फिर भी वहां की याद नहीं जाती। इसलिए हर तीन-चार महीने में कुछ-कुछ दिनों के लिए दिल्ली जाती रहती हूं। पिता भारत के मशहूर गायक की आवाज में हिंदी गाने गाते थे। छोटी थी तो उनका इंतकाल हो गया। मां ने गाना सिखाया। फिर भारत भेजा। अब क्लासिकल व फिल्मी भी गाती हूं\'। सोवियत संघ में भारतीय सिनेमा चर्चित अभिनेता-निर्देशक राजकपूर के नाम था जिससे इस इलाके में हिंदी फिल्मों के प्रति रुझान बढ़ा। सोवियत संघ के विघटन के बाद ताजकिस्तान अब अलग मुल्क है, लेकिन भारतीय फिल्मों का असर कायम है। लोग ताजिक भाषा में डब की हुई भारतीय हिंदी फिल्में देखते हैं। कभी मिथुन चक्रवर्ती सबसे पसंदीदा हीरो थे। अब शाहरुख खान खूब पसंद किए जाते हैं। होटल ताजकिस्तान में रिसेप्शन से आगे लिफ्ट के नजदीक भारतीय अभिनेत्री बिपाशा बसु की बड़ी तस्वीर वाला विज्ञापन लगा है। मर्जिया भी ताजकिस्तान में ही पैदा हुई, लेकिन दुल्हन बनीं सीतामढ़ी [बिहार] के रहने वाले कारोबारी की। दुशांबे में ही उनके पति का दिल्ली दरबार नाम से रेस्तरां है। मर्जिया कहती हैं, \'इंडिया अच्छा लगता है। दिल्ली के अलावा पटना और सीतामढ़ी भी गई हूं।\' हिंदी सीख चुकीं मर्जिया ने भी बतौर कारोबारी यहां उप राष्ट्रपति और उनकी पत्नी सलमा अंसारी से अपने अनुभव साझा किए। सलमा से उन्होंने भारतीय पतियों के बारे में टिप्स भी लिए। उप राष्ट्रपति अंसारी यहां अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़े लोगों से मिलकर गदगद हो गए। अंसारी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे हैं मेडिकल के मामले में भी ताजकिस्तान का भारत से रिश्ता है। मेडिकल की सस्ती पढ़ाई के नाते बड़ी संख्या में भारतीय छात्र यहां आते हैं। एक खास बात यह भी है कि छात्र यहां के होटलों व अन्य प्रतिष्ठानों में पार्टटाइम नौकरी कर अपना खर्च भी निकाल लेते हैं।