22 February 2019



प्रादेशिक
मंत्री के भाषण पर मचा बवाल
16-04-2013

झाबुआ। शहर में समर कैम्प के शुभारंभ पर आदिम जाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह अपने ही भाषण में फंस गए हैं। कांग्रेस ने उन्हें अमर्यादित करार देकर इस्तीफा मांग लिया है। वहीं भाजपा के प्रतिनिधि मंत्री के बचाव में उतर आए हैं। उधर प्रशासनिक तौर पर कमिश्नर ने कलेक्टर से बात कर मामले की पूरी जानकारी तलब कर ली है। शहर के कन्या उमा विद्यालय में शनिवार शाम मंत्री शाह का भाषण विवादों में आ गया है। समर कैम्प की श्रृंखला के पहले चरण में आए मंत्री शाह के भाषण के द्विअर्थी शब्दों पर बवाल मच गया है। हालांकि मंत्री ने अपने भाषण को मर्यादित श्रेणी का बताया है, लेकिन कांग्रेस उन पर तीखे हमले कर रही है। कांग्रेस ने पूरे मामले में उग्र रवैया अख्तियार कर मंत्री शाह का इस्तीफा मांग लिया है। सोमवार को कमिश्नर इंदौर संजय दुबे ने कलेक्टर जयश्री कियावत से बात कर मामले की जानकारी ली। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने भी मामले में काबीना मंत्री शाह को क्लीन चिट दे दी है इस तरह दिया भाषण समर कैम्प के शुभारंभ के वीडियो क्लिप में मंत्री शाह ने करीब 17 मिनट के अपने भाषण में योजनाओं का बखान हास्यभरे अंदाज में किया। इस दौरान उनके शब्द द्विअर्थी तो थे ही, साथ ही में हाव-भाव पर भी सवाल उठ गए। पहला दौर शुभारंभ और स्वागत भाषण के बाद मंच पर आए मंत्री शाह ने अपने भाषषण की शुरुआत भी चुटीले अंदाज में की। उन्होंने बहनों के साथ बाइयों शब्दों का उपयोग कर संबोधित किया। दूसरा दौर संबोधन के बाद मंत्री शाह अपने लय में आ गए और मंचासीन भाजपा प्रतिनिधियों को ही लपेटते चले गए। उन्होंने एक महिला नेत्री को नहीं हंसने पर राशि रोकने की बात भी कह दी। तीसरा दौर मंत्री शाह ने द्विअर्थी शब्दों की पूरी श्रृंखला ही खड़ी कर दी। उन्होंने कहा कि अपना पहला वो.. कोई नहीं भूल सकता। यह भुलाने लायक भी नहीं होता। झाबुआ के लोग समझदार हैं, जो हर बात को समझ लेते हैं। वे पसंद और चाहत तक चले गए। यहां छात्राएं तो शर्म से अपने सिर झुका चुकी थीं। चौथा दौर अपने भाषण में योजनाओं की जानकारी देते समय मंत्री शाह ने सीएम और उनकी पत्नी पर भी टिप्पणी से गुरेज नहीं किया। वे भाई और भाभी के रिश्ते की दुहाई देकर अपनी बात रखते रहे। हास्य था, द्विअर्थी नहीं दौलत भावसार, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भाजपा व मंचासीन अतिथि ने कहा कि मंत्री शाह ने अपने भाषण में हास्य के अंदाज में बात कही। समर कैम्प के माहौल में उन्होंने एक भी शब्द ऐसा नहीं कहा, जिसे द्विअर्थी मानकर मुद्दा बनाया जाए। यह तो कुंठित मानसिकता वालों की सोच है। कांग्रेस इसे जबरिया मामला बनाकर तूल देने का प्रयास कर रही है। भाषण में बुराई नहीं कल्याण सिंह डामोर, प्रदेश महामंत्री, भाजपा अजजा मोर्चा व मंचासीन अतिथि ने बताया कि समर कैम्प के समारोह में मैं पूरे समय मौजूद था। मंत्री शाह का भाषण सरल व सहज अंदाज वाला था। इसे किसी की भावनाओं को आहत करने वाला नहीं कहा जा सकता। वे योजनाओं का वर्णन कर रहे थे। हमारे बीच भी उन्होंने एक परिवार की तरह अपनी बात रखी। बर्खास्त किया जाए कांतिलाल भूरिया, अध्यक्ष, मप्र कांग्रेस कमेटी, भोपाल ने कहा कि शिवराज सरकार हर मोर्चे पर विफल हो चुकी है। अब इस सरकार की विदाई का समय आ गया है। महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं। सरकार के मंत्री महिलाओं के खिलाफ भी अभद्र भाषा का उपयोग कर रहे हैं। मंत्री शाह को तत्काल पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए। ठेस पहुंचाई कलावती भूरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष व प्रदेश कांग्रेस सचिव ने कहा कि प्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री ने छात्राओं और महिलाओं के बीच अमर्यादित भाषण देकर गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री व उनकी धर्मपत्नी पर भी टिप्पणी कर दी। इस तरह के आचरण पर मंत्री शाह को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। अभद्र आचरण जेवियर मका, कांग्रेस विधायक, झाबुआ ने बताया कि एक ऐसा समारोह, जिसे मॉडल बताया जा रहा है, वहां मंत्री शाह का इस तरह अभद्र आचरण वाला भाषण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम उनके भाषण की निंदा करते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि मंत्री शाह को तत्काल बर्खास्त किया जाए। गलत कुछ नहीं कुंवर विजय शाह, आदिम जाति कल्याण मंत्री, भोपाल ने बताया कि झाबुआ में समर कैम्प के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं कहा, जो मर्यादा की श्रेणी से बाहर का हो। भाषण में कुछ भी गलत नहीं था। अफसरों में भी हलचल उधर प्रशासनिक गलियारों में भी सोमवार को मंत्री का भाषण छाया रहा। कमिश्नर इंदौर संजय दुबे ने कलेक्टर जयश्री कियावत से चर्चा कर मामले की जानकारी ली है। बताया जा रहा है कि इस दौरान कलेक्टर ने उन्हें समर कैम्प के शुभारंभ से लेकर भाषण के दौरान सामने आए सभी तथ्यों से अवगत कराया। प्रशासनिक तौर पर भी मंत्री के भाषण पर आम राय सामने नहीं आ पा रही है। कुछ अफसर बयान देने से बच रहे हैं, तो कुछ ने द्विअर्थो को नकार दिया।